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जावली में 2100 कुंडीय महायज्ञ में कुंभ सा नजारा, व्यवस्थाओं में जुट रहे हजारों लोग….देखें वीडियो

वीडियोजावली के प्राचीन गौर मंदिर पर महंत गोवर्धनदास व मौनी बाबा शोभाराम भारती की प्रेरणा से 2100 कुंडयीय महायज्ञ के आयोजन से वातावरण धर्ममयी बना हुआ है।

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कठूमर. जावली के प्राचीन गौर मंदिर पर महंत गोवर्धनदास व मौनी बाबा शोभाराम भारती की प्रेरणा से 2100 कुंडयीय महायज्ञ के आयोजन से वातावरण धर्ममयी बना हुआ है। इसकी शुरुआत 30 अप्रेल को 10 हजार महिलाओं ने चार किमी लम्बी कलश यात्रा निकाल कर की थी।

करीब 40 बीघा में यज्ञशाला, भोजनशाला, भंडार गृह, कथा का पंडाल, खाने, नहाने, विश्राम कक्ष सहित सभी व्यवस्थाएं की है। प्रतिदिन 15 से 20 हजार लोगों को प्रसाद खिलाया जा रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए साधुओं के जमावड़े से यहां का ²श्य मिनी कुंभ सा लग रहा है। इस रूद्र महायज्ञ में अनेक प्रदेशों के श्रद्धालु आ रहे हैं। यज्ञ सम्पन्न करने के लिए बाहर के पंडित आए हुए हैं। यज्ञ के दौरान दूर तक लाउडस्पीकर पर गूंजते वैदिक मंत्र व सामग्री की खुशबू से वातावरण महक रहा है।

जुट रहे हजारों हाथ :

सबसे विशेष बात यह है कि हजारों स्वयंसेवक जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पचास-साठ जने रात्रि को करीब दो हजार किलो हवन सामग्री तैयार करते हैं। सैंकड़ों बच्चे स्वयंसेवक के गणवेश में हवन, कथा में बैठे श्रद्धालुओं को पानी पिलाने व अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे हैं। ग्रामीण अपने निजी टैंकरों से यज्ञ स्थल की परिक्रमा व अन्य प्रमुख स्थानों पर तपती रेत पर पानी का छिडक़ाव कर रहे हैं। हजारों श्रद्धालु यज्ञ व कथा स्थल की पैदल व दंडौती परिक्रमा लगा रहे हैं। अनेक गांवों के श्रद्धालु जो कथा का श्रवण करने आ रहे हैं, वे अपने साथ आयोजन में सहयोग देने के लिए अनाज व नककी का भी सहयोग कर रहे हैं। बगैर कहे लोग सब्जी, तेल, चीनी, लकड़ी व अन्य सामान पहुंचा रहे हैं।

भागीदारी निभाने को आतुर:

आयोजन में हजारों श्रद्धालु भागीदारी निभाने को आतुर है। यहां सब कुछ व्यवस्थित नजर आ रहा है। लोगों ने अपने सभी संसाधन आयोजन स्थल पर सेवा कार्य में लगा रखे हैं।

भंडारा 21 को :

21 मई को भंडारे की तैयारियों को लेकर भट्टियां तैयार करने का काम शुरू हो गया है। आयोजकों के अनुसार 160 भट्टियां बनाई जाएगी। प्रसादी में एक से डेढ़ लाख लोगों के आने की उम्मीद है।

संत शोभाराम भारती ने जावली की बढ़ाई शोभा

जावली की शोभा संत शोभाराम भारती ने पूरे देश में बढ़ा दी। आठ साल पहले ननिहाल जावली में रहते हुए अलवर में पढ़ाई की। गौर मंदिर में घंटों पूजा करते थे। एक दिन परिवार को बताए बिना घर छोड़ चला गया। आठ माह बाद घर पहुंचा और गुरु के आदेश पर मां से भिक्षा मांगी। मां ने चार भाई बहनों में सबसे बड़े पुत्र को भिक्षा देकर विदाई दी। तपस्वी शोभा अब गांव की शोभा बन गया। आठ साल बाद जावली में लौटे शोभाराम देश के बड़े तपस्वी संत बन गए हैं। दिखावे से कोसों दूर शोभाराम मौनी बाबा बन गए। तन पर वस्त्र नहीं। दिगंबर संत की तरह रहते हैं। उघड़ा बदन और तपती दुपहरी में ग्रामीणों के साथ इक्कीस सौ हवन कुंड तैयार कर यज्ञ शाला बना डाली। यहां राम कथा, शिव पुराण, रूद्र यज्ञ, रासलीला, रामलीला, भंडारा किया जा रहा है। देशभर के साधु-संत जावली पहुंच रहे हैं। जावली में 2100 कुंडीय महायज्ञ में कुंभ सा नजारा, व्यवस्थाओं में जुट रहे हजारों लोग