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INTERVIEW: प्रेम नाम में इसलिए फिट बैठते हैं सलमान…

सूरज बडज़ात्या का कहना है कि यह नाम उन पर पूरी तरह से सूट करता है और इस नाम की लोगों के जेहन मेें अलग जगह भी बन गई है।

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Shyamendra Parihar

Feb 24, 2016


ग्वालियर। हिन्दी फिल्मों के लिए वर्तमान समय सबसे अच्छा दौर है। इसीलिए इस दौर में एक से बढ़कर एक फिल्में बन रही हैं। विषयपरक और बॉयोपिक फिल्में जमकर पसंद की जा रही हैं, शायद इसी वजह से ऐसी फिल्मों पर काम भी हो रहा है।


यही बॉयोपिक फिल्में कुछ समय पूर्व तक डॉक्यूमेंट्री फिल्में समझी जाती थीं। यह कहना है प्रख्यात निर्माता-निर्देशक सूरज बडज़ात्या का, पारिवारिक प्रवास के लिए ग्वालियर आए सूरज ने पत्रिका से बातचीत की।

प्रेम नाम सिर्फ सलमान के लिए
सूरज बडज़ात्या से जब पूछा गया कि सलमान खान के लिए हर फिल्म में प्रेम नाम ही क्यों रखा जाता है। इस पर उनका कहना था कि यह नाम उन पर पूरी तरह से सूट करता है और इस नाम की लोगों के जेहन मेें अलग जगह भी बन गई है। मेरी हर फिल्म में इसीलिए सलमान का नाम सिर्फ प्रेम ही रहता है। मैंने प्यार किया के समय यह नाम ऐसे ही रख दिया था, आज यह लोगों की जुबां पर चढ़ चुका है।


तानसेन पर जरूर करूंगा काम

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सूरज ने बताया कि संगीत सम्राट तानसेन पर मूवी बनाने का मेरा सपना काफी समय से रहा है। इस पर मैंने काम किया भी था। स्व.संगीतकार रविन्द्र जैन को इसके बारे में मैंने बताया थी था और उन्होंने कुछ संगीत तैयार भी किया था। तानसेन पर फिल्म बनाने के लिए गूढ़ अध्ययन की जरूरत है। तानसेन के प्रोजेक्ट पर मैं काम जरूर करूंगा, इसके लिए संगीत पर बहुत काम करना होगा।


कन्फ्यूज है आज का यूथ
सूरज बडज़ात्या ने कहा कि आज का यूथ बहुत कन्फ्यूज है। कॅरियर को लेकर, रिलेशन को लेेकर। वर्तमान दौर में वैल्यूज की कमी भी है। इसीलिए राजश्री प्रोडक्शन इसे ध्यान में रखकर अपनी फिल्मों का निर्माण करता है। राजश्री की फिल्मों को देखकर आज भी जब लोगों के फोन आते हैं तो मन को काफी अच्छा लगता है।

अच्छे राइटर और डायरेक्टर की कमी
सूरज ने कहा कि हिन्दी फिल्मों में अच्छे राइटर और डायरेक्टर की कमी महसूस की जा रही है। इसके लिए जब भी बात चलती है तो मैं हमेशा ही राजकुमार हिरानी का उदाहरण देता हूं क्योंकि उनकी फिल्मों में मनोरंजन के साथ-साथ संदेश जरूर होता है। उनकी सभी फिल्मों को दर्शक खासा पसंद करते हैं।

14 सालों में बहुत कुछ बदला
सूरज बडज़ात्या ने बताया कि 14 वर्ष पूर्व जब सलमान को लेकर फिल्म बनाई थी तब अलग माहौल था। आज हफ्ते भर में ही फिल्में 100 करोड़ की दौड़ में शामिल हो जाती हैं। मल्टीप्लेक्स के इस दौर में भी सिंगल स्क्रीन सिनेमा लोगों के बीच अपनी खासियत बनाए हुए है और यह दौर हमेशा कायम रहेगा।

एक्सपेक्टेशन पर खरी नहीं उतरी प्रेम रतन
सूरज से जब पूछा गया कि प्रेम रतन धन पायो को क्रिटिक्स ने फंतासी फिल्म कहकर नकार दिया। इस पर उनका कहना था कि ये बात सही है कि फिल्म एक्सपेक्टेशन पर खरी नहींं उतरी, पर मैं इस फिल्म से पूरी तरह संतुष्ट रहा। फिल्म में यूथ अपील कम होने के कारण ऐसा हुआ। फिर भी परिवारों के बीच इस फिल्म ने अपनी जगह बनाई।

मार्च-अप्रैल में नई फिल्म पर काम
नए प्रोजेक्ट पर काम करने के बारे में सूरज बडज़ात्या ने कहा कि जल्द ही राजश्री के तीन टीवी सीरियल छोटे पर्दे पर दिखाई देंगे, इसके लिए चैनलों पर बात चल रही है। ये सीरियल भी परिवार के साथ देखने योग्य होंगे। इसके साथ ही मार्च-अप्रैल से नई फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम करना शुरू करूंगा।

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