वे मृग रूप में क्यों थे, यह एक शाप के कारण हुआ था। उसकी कथा यह है कि एक बार उन ब्राम्हण पुत्रों द्वारा हिरन के पांच छोटे बच्चों का वध हो गया था। घर जाकर बालकों ने अपने पिता को सारा वृत्तांत सुनाया और प्रायश्चित का मार्ग पूछा। तभी वहां भृगु ऋषि, अत्रि और अभि ऋषि आ गए। सारी बातें जानने पर वे बोले कि प्रायश्चित हेतु तुम पांचों बच्चे पांच वर्ष तक मृग चर्म ओढ़ कर वन में रहो। इस प्रकार वे पांचों वन में भटक रहे थे और एक वर्ष के पश्चात राजा वीरधन्वा ने उन्हें मृग समझ मार डाला।