धर्म ग्रंथों के अनुसार पितरों की भक्ति से मनुष्य को पुष्टि, आयु, वीर्य और धन की प्राप्ति होती है। ब्रह्माजी, पुलस्त्य, वशिष्ठ, पुलह, अंगिरा, क्रतु और महर्षि कश्यप-ये सात ऋषि महान योगेश्वर और पितर माने गए हैं। श्राद्ध पक्षों में श्रद्धालु अपने पूर्वजनों की श्राद्ध वाली तिथि के दिन सबसे पहले अपने पिता को पिंडदान करना चाहिए। इसके बाद दादा को और फिर परदादा को पिंड देना चाहिए। यही श्राद्ध सही विधि है। इस दौरान गायत्री मंत्र के जाप के साथ सोमाय पितृमते स्वाहा का उच्चारण करना भी लाभकारी होता है।