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पृथ्वीराज चौहान ने बनवाया था ये शिव मंदिर, 841 साल से जल रही है अखंड ज्योति

वनखंडेश्वर महादेव मंदिर जितना अपनी मंदिर की खूबसूरती के लिए जाना जाता है उससे कहीं अधिक अपनी दिव्यता और ऐतिहासिक महत्व के लिए विख्यात है।

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Shyamendra Parihar

Jul 26, 2016

prithviraj chauhan built vankhandeswar mandir

prithviraj chauhan built vankhandeswar mandir

ग्वालियर/भिंड। शहर ग्वालियर से महज 80 किलोमीटर दूर भिंड शहर के बीचो बीच स्थित हैं वनखंडेश्वर महादेव। यह मंदिर जितना अपनी मंदिर की खूबसूरती के लिए जाना जाता है उससे कहीं अधिक अपनी दिव्यता और ऐतिहासिक महत्व के लिए विख्यात है। इस मंदिर का निर्माण 11वीं सदी में महान राजा पृथ्वीराज चौहान ने करावाया था। स्थापना के बाद से अब तक यहां अखंड ज्योति जल रही है।






ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर सिद्ध शक्तिपीठ वनखंडेश्वर महादेव मंदिर दिल्ली के तत्कालीन शासक पृथ्वीराज चौहान द्वारा महोबा के राजा आल्हा और उदल से युद्ध करने जाते वक्त बनवाया था। इन्होंने शिव पूजन के पश्चात अन्न-जल ग्रहण करने का नियम लिया था जब रास्ते में इस स्थान पर पड़ाव डाला तब वनखंड में शिवलिंग की स्थापना कराई। यहां ज्योति जलाई जो अब तक जल रही है। इस ज्योति को जलाने के लिए श्रद्धालुओं द्वारा दीपकों में घी भरा जाता है।





सावन में लगता है यहां मेला
कई लोग श्रद्धापूर्वक और कई लोग मन्नत पूरी होने पर दीपकों में घी भरते हैं। इस कार्य के लिए जिले के ही नहीं दूरदराज के लोग आते रहते हैं। महाशिवरात्रि पर्व पर भक्तों का मेला लगता है, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा कांवर में लाए गए गंगाजल से महादेव का अभिषेक किया जाता है। इसी प्रकार श्रावण मास में प्रतिदिन श्रद्धालुओं द्वारा पूजा-अर्चना की जाती है।

मंदिर में नहीं खा सकता कोई झूठी कसम
श्रद्धालुओं का मानना है कि सावन के हर सोमवार को भगवान वनखंडेश्वर महादेव का अभिषेक कर पूजा अर्चना करने से मनचाही मुराद जल्द पूरी होती है। इस मंदिर के भीतर अखण्ड ज्योति तभी से निरंतर जल रही है. इस मंदिर से जुड़ी एक आस्था ये भी है कि इस मंदिर के भीतर कोई भी व्यक्ति झूठी कसम नहीं खा सकता, जो भी ऐसा करता है उसके साथ अनहोनी घटित होती है।

शिवजी की सौगंध खाने से मिल जाते है संदेह
ऐसी मान्यता है की यहां आसपास के इलाकों के लोग अपने पुराने लड़ाई-झगड़ों और चोरी-डकैती के संदेही व्यक्तियों को यहां सौगंध दिलवाने लाते हैं। बताया जाता है कि गलत व्यक्ति खुद इस मंदिर में आने से डरता है. सावन के दिनों में इस प्राचीन शिवमंदिर पर पर मेले का नजारा देखने को मिलता है।