तब भगवान् कृष्ण ने कहा की हमें गाय की पूजा करनी चाहिए न की इंद्र देव की उनकी इस बात से देव राज इंद्र नाराज हो गए और गुस्से में उन्होंने गोकुल में आंधी तूफान और वर्षशुरू कर दी तब गोकुल निवासियों को बचाने के लिए भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की अपने हाथ की सबसे छोटी उंगली पर उठा लिया |
सारे जानवर गांव वाले गोवर्धन पर्वत के नीचे आ गये तब उन्होंने अपने शेषनाग को बोला की वह अपना पूरा फन फैलाकर बारिश को आने से रोके सात दिन बारिश नहीं रुकी | तब इंद्र देव को अपनी गलती का अहसास हुआ की ये कोई आम मनुष्य नहीं हैं। ये तो स्वयं विष्णु जी का अवतार हैं। उसके बाद इंद्र देव ने भगवान कृष्ण जी से माफ़ी मांगी और तभी से गोवर्धन की पूजा शुरू हो गई | उस दिन के बाद से अन्न कूट और पूरी के प्रसाद से गोरधन को भोग लगाया जाता है।
पूजा करने की विधि :
इस दिन ब्रह्म महूर्त में स्नान करने के बाद गाय का गोबर लाएं। जिस स्थान पर आप को गोवर्धन की पूजा करनी है उस स्थान को अच्छी तरह से साफ़ कर लें। फिर उस स्थान पर कृष्ण भगवान की आकृति या गोवर्धन बना लें|
अगर आपके घर में गाय, भैस, बैल, है तो सुबह सवेरे उन्हें स्नान करा कर उनके गले में नई घंटी और रस्सी बांधनी चाहियें और उनका तिलक करके गुड़, चावल और मिठाई खिलाने के बाद आरती उतारे |और शाम को प्रसाद के लिए खीर, हलुवा, पूरी, और अन्न कूट (सभी सब्जियों को मिला कर बनाई हुई) की सब्जी बनाएं| और शाम को घर के सभी पुरुष और बच्चे मिल कर गोवर्धन बाबा की पूजा करते|
पूजा की थाली में देशी घी का दीया, धूप, अगरबत्ती, बताशे, एक कटोरी में हलुवा , एक कटोरी में खीर, एक कटोरी में पंचामृत ( गंगा जल, दूध, शहद, दही, तुलसी के पत्ते, शक्कर) एक कटोरी में अन्नकूट की सब्जी और पूरी ले| एक जल का लोटा , और अपने हाथो में खील लेले|
उसके बाद गोवर्धन बाबा के चारो तरफसात बार घूमें और परिवार का मुखियां ओर दूसरे हाथ में खील को बिखेरते हुए चलेऔर एक हाथ में लोटा के जल से धार बनाते हुए सात बार परिक्रमा करें|
गोवर्धन की सुंडी (नाभि) में एक दीया जलाया जाता है फिर उनको खीर, पूरी , हलुवे का और सब्जी का भोग लगायें| फिर परिवार के सभी सदस्य प्रसाद ग्रहण करे | और इस दिन को विश्वकर्मा दिवस के रूप में मनाया जाता है| इस दिन सभी फक्ट्री और कारखाने जो जिस भी व्यवसाय में वो सब बंद रहते है और वे सब उस दिन अपने औजारों की पूजा करते है | गोवर्धन का त्यौहार मनाने से घर में सुख, समृद्धि और सम्पन्नता आती है।