तुम्हारा काम धंधा बंद है, पर मैं क्या करू

मुंबई में बड़े पैमाने पर लोग किराए के मकान में रहते हैं। मुंबई में मकान का किराया और खाने पीने की चिंता ही अधिकतर लोगों के पलायन का प्रमुख कारण है। किराएदारों पर मकान का किराया चुका पाना बड़ी चुनौती है।मकान मालिक और किराएदार दोनों की अपनी समस्याएं हैं।

By: Dheeraj Singh

Updated: 16 May 2020, 09:54 PM IST

धीरज सिंह

मुंबई.कोरोना के कारण लोगों की आजीविका पर संकट है। घोषित लॉक डाउन की वजह से काम धंधा बंद है। लोगों के पास पैसे की तंगी हो गई है। मुंबई में बड़े पैमाने पर लोग किराए के मकान में रहते हैं। मुंबई में मकान का किराया और खाने पीने की चिंता ही अधिकतर लोगों के पलायन का प्रमुख कारण है। किराएदारों पर मकान का किराया चुका पाना बड़ी चुनौती है। मकान मालिक और किराएदार दोनों की अपनी समस्याएं हैं।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार की ओर से यह आदेश जारी किया गया है कि लॉकडाउन के कारण तीन माह से किराएदारों से किराया न मांगा जाए और न ही मकान खाली कराया जाए। परंतु उसके बावजूद कुछ जगहों पर मकान मालिकों की ओर किराया देने के लिए दवाब बनाए जाने और उससे लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। उल्हासनगर में एक मकान मालिक अपने किराएदार को किराया देने के लिए परेशान कर रहा था। जिसके खिलाफ पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई गई। बड़े पैमाने पर लोग शिकायत नहीं दर्ज करा रहे हैं।

बता दें मुंबई और एमएमआर रीजन में बड़े पैमाने पर प्रवासी मजदूर रहते हैं। अधिकतर किराए के मकान में रहते हैं। सूरजपाल बतातें हैं कि पहली बार जब लॉक डाउन हुआ तो हमने सोचा कि एक माह का किराया किसी न किसी तरह से एडजस्ट कर लिया जाएगा। परंतु जब लॉक डाउन बढ़ा दिया गया तो हम सबकी चिंताएं बढ़ गई। सो किसी तरह से गांव के लिए निकल रहे हैं।इस बारे में विभिन्न क्षेत्रों के मकान मालिकों और किराएदारों से बातचीत की गई।

मुलुंड के एक अपार्टमेंट में रहने वाली आशा बतातीं हैं कि मेरे घर का किराया 10 हजार रुपए है। वहीं हमारी दुकान का किराया 10 हजार रुपए है। पिछले दो महीने से दुकान बंद है। ऐसे में किराया कहां से चुकाएं। इसके अलावा रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी कठिन है। छोटी-सी दुकान से पूरे परिवार का खर्च चलता है। मेरी एक बेटी इंजीनियरिंग कर रही है। दूसरी नौवीं कक्षा में हैं। हर महीने के अंत में उधारी से काम चलता है। दो माह की बंदी से पूरी व्यवस्था बिगड़ गई है।

वहीं मकान मालिक जीतलाल का कहना है कि मैं प्राइवेट नौकरी करता था। अब रिटायर्ड हो गया हूं। बेटी का विवाह हो गया है। बेटा मुझसे अलग रहता है। ऐसे में किराए पर दिए मकान से मेरा घर चलता है। अब लॉक डाऊन में किराएदार से पैसे मांगना उचित नहीं लगता, लेकिन इसके अलावा मेरे पास कोई चारा भी नहीं है ,कल्याण के लाला पान शाप नामक दुकान के दुकानदार विमलेश (लाला) चौरसिया ने कहा कि लॉक डाउन की वजह से दुकान बंद है। हालत खराब हो गई है। हम परिवार की व्यवस्था करें या भाड़ा भरें। घर में बैठकर दुकान का भाड़ा कहां से देंगे। परिवार कैसे चलेगा और जिन होलसेलरों से माल लिया गया है उनका पेमेंट कैसे होगा। इस तरह की अनेक समस्या दुकानदारों के सामने खड़ी हो गई है। अभी तक मालिक की ओर से कोई दवाब नहीं आया है,पर भाड़ा देना तो पड़ेगा।

उल्हासनगर पंजाबी कॉलोनी में रहने वाले एक किराए दार रामराज जैसवार (बदला हुआ नाम ) ने बताया कि हमारे मकान मालिक का कहना है कि किराया तो देना पड़ेगा,काम धंधा बंद है तो मैं क्या करूं, आप लोग इंतजाम करो। जान पहचान होने के कारण अभी तक मकान खाली करने के लिए तो नहीं कहा। पर बार बार किराया मांगकर प्रेशर जरूर दे रहे हैं।

मकान मालिक रामप्रसाद वर्मा ने कहा कि मेरा 7 मकान किराए पर है,पर मैंने लोगों की परेशानी को देखते हुए अभी तक किसी से न तो किराया मांगा है,और न ही मकान खाली करने के लिए कहा है। क्योंकि सभी लोग बहुत वर्षो से मेरे मकान में रहते हैं,आज नहीं तो कल किराया दे देंगे। उनका डिपाजिट मेरे पास है। लॉक डाउन की परेशानी मैं समझ सकता हूं। खाने पीने और रोजमर्रा को चीजों के लिए पैसे नहीं है। किराया कहां से देंगे।

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Dheeraj Singh Reporting
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