script बड़ी खबर! महाराष्ट्र के रेजिडेंट डॉक्टर 7 फरवरी से हड़ताल पर, इन मरीजों की बढ़ेगी परेशानी | Maharashtra resident doctors on statewide strike from 7 February | Patrika News

बड़ी खबर! महाराष्ट्र के रेजिडेंट डॉक्टर 7 फरवरी से हड़ताल पर, इन मरीजों की बढ़ेगी परेशानी

locationमुंबईPublished: Feb 04, 2024 09:07:42 pm

Submitted by:

Dinesh Dubey

Maharashtra Strike: हड़ताल की वजह से आउट पेशेंट विभाग यानी ओपीडी के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

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महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टर की हड़ताल (File)
Maharashtra Doctor Strike: महाराष्ट्र में एक बार फिर रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल (Resident Doctor Strike) होने वाली है। अपनी लंबित मांगें पूरी नहीं होने के कारण रेजिडेंट डॉक्टरों में नाराजगी है. इसलिए राज्यव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया है। रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि राज्य सरकार ने कई बार आश्वासन दिया, लेकिन फिर भी उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसलिए मजबूरन उन्हें हड़ताल पर जाना पड़ रहा है। इस वजह से मुंबई समेत राज्यभर के सरकारी अस्पतालों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित होने की संभावना है।
महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (एमएआरडी) ने एक बयान में कहा कि राज्य के रेजिडेंट डॉक्टरों की कई समस्याएं काफी समय से लंबित हैं। पिछले एक साल में संगठन ने इसके लिए सरकार से बार-बार अपील की है। लेकिन प्रशासन की ओर से हर बार हमें सिर्फ आश्वासन दिया गया।
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एसोसिएशन का आरोप है कि असल में हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सेंट्रल एमएआरडी (मार्ड) संगठन ने विभिन्न लंबित मांगों को लेकर 7 फरवरी को शाम 5 बजे से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। हड़ताल के दौरान सभी आवश्यक सेवाएं जारी रहेंगी। जबकि ओपीडी और आईपीडी सेवाएं ठप रहेंगी।
मार्ड एसोसिएशन ने रेजिडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल के कारण मरीजों को होने वाली परेशानी के लिए माफी मांगी है। बयान में कहा गया है, "रेजिडेंट डॉक्टरों को कभी भी उनके उचित स्टाइपेंड का भुगतान समय पर नहीं किया गया है। कई महीनों से स्टाइपेंड बकाया होने के कारण रेजिडेंट डॉक्टरों के मूल अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।"
एसोसिएशन का कहना है कि रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए पर्याप्त संख्या में हॉस्टल उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में एक ही कमरे में दो-तीन डॉक्टरों को बेहद परेशानी में रहना पड़ता है। हमने बार-बार प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखीं। और हर बार केवल मौखिक आश्वासन ही दिया गया। बयान में कहा गया, प्रशासन के इस रवैये के कारण हमें हड़ताल पर जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नजर नहीं आ रहा है।

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