
डॉक्टर ने बेहद सावधानी और संवेदनशीलता के साथ सिल्वर सल्फर डायजिन से ड्रेसिंग की,
A moving train, a child in arms, and a cup of hot tea. नरसिंहपुर। चलती ट्रेन, गोद में मासूम और हाथ में गरम चाय… एक पल की असावधानी ने दो वर्षीय बच्चे की मुस्कान को दर्द में बदल दिया। पवन एक्सप्रेस अप ट्रेन क्रमांक 11062 में 15 जनवरी को दरभंगा से कल्याण की यात्रा कर रहे यात्री मुकेश के बच्चे पर अचानक गरम चाय गिर गई। गरम चाय से बच्चे का पूरा पेट झुलस गया और वह दर्द से बिलखने लगा। मासूम की चीखें सुनकर कोच में बैठे यात्रियों की आंखें भी भर आईं।
घटना कटनी के बाद हुई। बच्चे की हालत देख माता-पिता घबराए हुए थे और ट्रेन में कोई स्थायी चिकित्सा सुविधा न होने से चिंता और बढ़ गई। इसी बीच सूचना नरसिंहपुर के डिप्टी कमर्शियल विभाग तक पहुंची। मानवीय संवेदना दिखाते हुए विभाग ने तुरंत रेलवे चिकित्सक को अलर्ट किया।
ट्रेन के नरसिंहपुर स्टेशन पहुंचते ही रेलवे चिकित्सक डॉक्टर आर. आर. कुर्रे ने बिना औपचारिकता में समय गंवाए बच्चे को अपने पास लिया। जांच में सामने आया कि जलने से पूरे पेट पर फफोले पड़ चुके हैं। डॉक्टर ने बेहद सावधानी और संवेदनशीलता के साथ सिल्वर सल्फर डायजिन से ड्रेसिंग की, साथ ही संक्रमण से बचाव के लिए एंटीबायोटिक और दर्द से राहत के लिए दवा सिरप के रूप में दी गई।
इलाज के दौरान रोते बच्चे को संभालते माता-पिता की आंखों में डर साफ झलक रहा था, लेकिन उपचार के बाद जब बच्चे को कुछ राहत मिली तो चेहरे पर सुकून दिखाई दिया। प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे को आगे की यात्रा के लिए अनुमति दी गई।
यात्री ने कहा कि यदि समय पर इलाज न मिलता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। नरसिंहपुर में रेलवे चिकित्सक की तत्परता और मानवीय दृष्टिकोण ने मुश्किल घड़ी में बड़ी राहत दी।
Published on:
16 Jan 2026 01:23 pm

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