महाराष्ट्र में भाषा विवाद के बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भाजपा पर विवादित बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा भाषा का ध्रुवीकरण कर रही है। उनके इस बयान से राजनीतिक घमासान तेज होने की आशंका है, खासकर मुंबई में चल रहे भाषा विवाद को लेकर।
महाराष्ट्र में अब भाषा को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने बवाल मचाने वाला बयान दे दिया है। उन्होंने भाजपा के लिए ऐसी बात कह दी है, जिससे घमासान तय है।
दरअसल, मुंबई में चल रहे भाषा विवाद के बीच हर्षवर्धन सपकाल ने भाजपा पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि वे भाषा का ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रहे हैं।
हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि भाजपा हर दिन धर्मनिरपेक्षता शब्द को कोसती रहती है। धर्मनिरपेक्षता देश और उसकी संस्कृति के लिए जरूरी है।
धर्मनिरपेक्षता का इस्तेमाल सिर्फ भाषा के लिए ही नहीं, बल्कि समानता और जाति के लिए भी किया जाता है। राज्य भी धर्मनिरपेक्षता का इस्तेमाल करते हैं।
धर्मनिरपेक्षता का इस्तेमाल भाषा के लिए भी किया जाता है। भाजपा को धर्मनिरपेक्षता की कोई चिंता नहीं है, इसलिए वे देश की 22 भाषाओं के बीच दरार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
विविधता में एकता का धर्मनिरपेक्षता से सीधा संबंध है। उन्होंने कहा कि दोनों ही अवधारणाएं भाषा और संस्कृति से जुड़ी हैं। वे पहले ही जाति और धर्म के आधार पर ध्रुवीकरण कर चुके हैं। अब वे भाषा का भी ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा एक देश, एक नेता, एक धर्म, एक भाषा में विश्वास करती है और इससे पहले भी भाजपा धर्म और जाति के बीच दरार पैदा कर चुकी है।
दूसरी तरफ, मुंबई में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के मुद्दे पर बोलते हुए, आदित्य ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि देश में सभी को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि हर किसी को विरोध करने का अधिकार है। हमें नहीं पता कि भाजपा महाराष्ट्र और मराठी विरोधी क्यों है और कल रात लोगों को क्यों गिरफ्तार किया गया? वहां एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुआ था। उन्हें इसकी अनुमति देनी चाहिए थी। हर किसी को विरोध करने का अधिकार है।
आदित्य ने कहा कि भाजपा महाराष्ट्र में नफरत फैलाने और मराठी और गैर-मराठी लोगों के बीच टकराव पैदा करने की कोशिश कर रही है। उनका एजेंडा काम नहीं करेगा। बिहार और बीएमसी चुनावों के लिए उनका एजेंडा फूट डालना है। यह भाजपा की चाल है और वह इसमें कामयाब नहीं होगी।