
Monsoon in India: भारत में इस साल मॉनसून सामान्य के काफी हद तक बेहतर रहने वाला है। जून से शुरू होने वाले मॉनसून में औसत से अधिक बारिश हो सकती है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पूर्वानुमान जताया है कि जल्द ही ला नीना का असर प्रशांत महासागर में देखने को मिलेगा। NOAA (National Oceanic and Atmospheric Administration of the US) ने अनुमान जताया है कि अगले कुछ महीनों में ला नीना का असर प्रशांत महासागर में देखने को मिल सकता है। इसके कारण भारत में भारी बारिश और देश के कुछ हिस्सों में बाढ़ की स्थिति भी बन सकती है। जून से इसकी शुरुआत हो जाएगी। अमेरिका के राष्ट्रीय समुद्री और वायुमंडलीय प्रशासन के जलवायु पूर्वानुमान केंद्र ने पिछले सप्ताह ही एक टाइम टेबल जारी किया है। इसमें बताया गया कि ला नीना का असर जून और अगस्त के शुरुआत में देखने को मिलेगा।
मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि इस बार ला नीना के चलते औसत से अधिक बारिश यानी 106 फीसदी बारिश होने की संभावना है। पिछले साल ये सामान्य से 94 फीसदी कम थी।
भारत में ज्यादातर बारिश जुलाई और अगस्त में होती है और ला नीना (La Nina) के कारण होने वाली अधिक बारिश के से किसानों को खेतों में सिंचाई में भी मदद मिलेगी। सही मात्रा में बारिश चीनी, दोल, चावल और सब्जियों जैसे मुख्य खाद्य पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित कर सकती है, जिससे मुद्रास्फीति की समस्या पर भी लगाम लग सकता है।
भारत में अल नीनो की बात करें तो ये अधिक गर्मी और कमजोर मॉनसून की वजह बनता है। वहीं ला नीना औसत से अधिक बारिश और ज्यादा ठंड पड़ने की संभावना होती है। भारतीय मौसम विभाग ने भी ला नीना के विकसित होने की पूर्ण संभावना जताई है। NOAA का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में ला नीना से जुड़ी घटनाएं देखने को मिली हैं। ये अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत में इसकी शुरुआत जून से हो जाएगी।
Updated on:
13 May 2024 11:25 am
Published on:
13 May 2024 09:31 am

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