राष्ट्रीय

Social media में एआई के इस्तेमाल से सहमे सियासी दल!

- 'Deepfake' वीडियो से चुनावों को प्रभावित करने की आशंका- केंद्र जुटा ट्रैसेबिलिटी प्रावधान के इस्तेमाल की जुगत में

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Oct 17, 2023
सोशल मीडिया में एआई के इस्तेमाल से सहमे सियासी दल!

नई दिल्ली। सोशल मीडिया की सीढ़ी के सहारे सत्ता के गलियारों तक पहुंचने को आतुर रहने वाले सियासी दल आने वाले चुनाव में व्हाट्सएप जैसे इंसटेंट मैसेजिंग सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की मदद से बनी 'डीपफेक' न्यूज की बाढ़ आने की आशंका से सहम गए हैं। इन्हें डर है कि चुनावी मौसम में कहीं डीपफेक वीडियो किसी के लिए वरदान तो किसी के लिए 'भस्मासुर' का कड़ा नहीं बन जाए।

केंद्र सरकार ने भी इस आशंका को भांप लिया है। इसके चलते केंद्रीय सूचना तकनीक (IT) मंत्रालय ऐसे डीपफेक वीडियो पर अंकुश व जवाबदेही तय करने के लिए आईटी नियम 2021 के ट्रैसेबिलिटी प्रावधान का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है। इसमें सोशल मीडिया प्लेटफार्म को उस व्यक्ति की पहचान बतानी होगी, जिसने सबसे पहले ऐसा संदेश अपलोड किया था। इसके आधार पर सरकार संदेश भेजने वाले को नोटिस देकर कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगी।

इसलिए छूट रही झुरझुरी

दरअसल, fake news का दायरा अब Photoshop व video editing से काफी आगे निकल गया है। एआई को किसी की भी फोटो व आवाज भेजकर हूबहू दिखने वाला वीडियो तैयार किया जाने लगा है। पिछले दिनों एक अंतरराष्ट्रीय यू-ट्यूबर व एक वैश्विक न्यूज चैनल के दो एंकर के डीपफेक वीडियो के जरिए धोखाधड़ी की कोशिश हो चुकी है। वहीं केरल में एआई की मदद से परिचित का चेहरा लगाकर वीडियो कॉलिंग फ्रॉड का मामला दर्ज हुआ है। ऐसे में चुनाव के दौरान डीपफेक वीडियो के जरिए दुष्प्रचार की आशंका बढ़ गई है। केंद्र सरकार तक कई नेताओं के ऐसे डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने की बात पहुंची है। इसके बाद से ही आईटी मंत्रालय ने इसका तोड़ निकालने की कवायद शुरू की है।

आसान नहीं है कानूनी हथियार

जानकारों का कहना है कि ट्रैसेबिलिटी प्रावधान का इस्तेमाल आसान नहीं है। इसे लागू करने के लिए कई शर्तें भी हैं। व्हाट्सएप ने इसी आधार पर इसे दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है कि उसके प्लेटफार्म पर चलने वाले मैसेज 'एंड टू एंड इंक्रिप्टेड' (ईटूईई) होते हैं। यानी व्हाट्सएप समेत किसी तीसरे को पता नहीं चलता कि मैसेज किसने और किसे भेजा है। ईटूईई सिस्टम खत्म होने से यूजर की निजता प्रभावित हो सकती है।

निकल सकता है बीच का रास्ता

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार उलझन में फंसी केंद्र सरकार बीच का रास्ता निकालने पर भी सोच रही है। इसके तहत सोशल मीडिया साइट्स के लिए मैसेज के साथ 'डिस्क्लेमर' लगाना जरूरी किया जा सकता है कि यह संदेश 'फैक्ट चैक्ड (जांचा नहीं गया) है...' यानी पढ़ने वाला अपने विवेक से फैसला करे। फैसला क्या होगा, इस पर सभी मौन हैं, लेकिन आईटी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने जरूर संकेत दिया था कि डीपफेक मैसेजिंग पर अंकुश के लिए ट्रैसेबिलिटी का प्रावधान लागू किया जाना चाहिए।

'इंडिया' भी जता चुका आशंका

चुनाव के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के कथित पूर्वाग्रह को लेकर विपक्षी दलों का गठबंधन 'इंडिया' भी पिछले सप्ताह आशंका जता चुका है। कांग्रेसाध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे व एनसीपी नेता शरद पवार समेत 'INDIA' के चौदह नेताओं ने इस मामले में फेसबुक व व्हाट्सएप संचालित करने वाले मेटा ग्रुप के सीईओ मार्क जुकरबर्ग व यूट्यूब संचालक गूगल के प्रमुख सुंदर पिचाई को पत्र लिखकर 'सांप्रदायिक नफरत को बढ़ावा देने' में उनके सोशल मीडिया प्लेटफार्म की कथित भूमिका वाली अमरीका के 'Washington Post' अखबार की रिपोर्ट के हवाले से चुनावों के दौरान तटस्थ रहने का आग्रह किया है। रिपोर्ट में भाजपा और मोदी सरकार के प्रति फेसबुक, व्हाट्सएप और यूट्यूब के कथित पूर्वाग्रह को कथित रूप से उजागर किया था।

Published on:
17 Oct 2023 10:22 am
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