शराब से संबंध और जीन में बदलाव जैसी कोरोना वैक्सीन जुड़ी हैरानी भरी जानकारी

  • कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए जल्द आ सकती है वैक्सीन।
  • कोविड-19 वैक्सीन को लेकर फैली हैं कई अफवाहें और लोगों के हैं सवाल।
  • यहां पर इससे जुड़े तमाम महत्वपूर्ण सवालों के जवाब आसानी से ले सकते हैं।

नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी के बीच वर्ष 2020 खत्म हो गया है और इस साल भारत में कोविड वैक्सीन मिलने की उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। हालांकि बीते कुछ वक्त से वैक्सीनेशन को लेकर सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाई को देखने पर इस बात की काफी संभावना जताई जा रही है कि जनवरी में देश में वैक्सीनेशन शुरू हो जाएगा। हालांकि वैक्सीन आने से पहले ही इसे लेकर कई भ्रांतियां और सवाल भी लोगों के जेहन में आ रहे हैं। जानिए कोरोना वैक्सीन से जुड़ी हैरानी भरी जानकारी।

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सवाल 1: अतीत में टीकों को ऑटिज्म से जोड़ा गया है। इनका क्या?

जवाबः वर्ष 1985 में एमएमआर को ऑटिज्म से जोड़ने वाला एक पेपर था। इसके बाद लाखों बच्चों ने यह साबित कर दिया कि वैक्सीन और ऑटिज्म के बीच कोई संबंध नहीं है। सभी टीके न्यूनतम अस्थायी दुष्प्रभावों (साइड इफेक्ट्स) के साथ बेहद सुरक्षित हैं।

सवाल 2: ऐसे जानकारियां भी आ रही हैं कि वैक्सीन mRNA मानव जीनोम में शामिल हो जाती है और हमारी आनुवंशिक संरचना (जेनेटिक स्ट्रक्चर) को बदल देती है। क्या यह सच है?

जवाबः mRNA वैक्सीन सेल को स्पाइक प्रोटीन का उत्पादन करने के लिए एक मैसेज देता है जो एंटीबॉडी उत्पादन को प्रेरित करता है। यह वही करता है जो इसे करने के लिए निर्देशित किया जाता है। आज तक कोई प्रतिकूल घटना दर्ज नहीं की गई है।

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सवाल 3: अल्कोहल और कोविड वैक्सीन की परस्पर क्रिया (इंटरेक्शन) क्या है?

जवाबः अत्यधिक शराब सेवन, वैक्सीन के लिए प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं (इम्यूनिटी रिस्पॉन्स) को कम कर सकता है। चूंकि रूस के लोगों को भारी शराब पीने के लिए जाना जाता है, इसलिए उनकी सरकार ने पहली खुराक के दो सप्ताह पहले और दूसरी खुराक के 6 सप्ताह बाद तक शराब पीने से बचने की सलाह दी है। स्पुतनिक वैक्सीन 21 दिनों में दो खुराक के रूप में दी जाती है। कभी-कभार शराब या बीयर का गिलास प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

सवाल 4: वायरस उत्परिवर्तित (म्यूटेट) हो गया है तो क्या हमें एक और टीके की जरूरत होगी। क्या हमें इंतजार नहीं करना चाहिए?

जवाबः अब तक वायरस ने फ्लू वायरस की तरह म्यूटेशन की प्रवृत्ति नहीं दिखाई है। इसके अलावा, विकसित किए जा रहे टीकों में इसे ध्यान में रखा गया है और इससे अभी भी काम करना चाहिए।

सवाल 5: अगर मैं वैक्सीन नहीं लेना चाहता तो क्या होगा? क्या इसे अनिवार्य किया जाएगा?

जवाबः अधिकांश देशों में यह अनिवार्य नहीं होगी। आपको बिना किसी विशेष उपचार के साथ नई वायरल बीमारी और और नए टीके के बीच चुनाव करना होगा। चयन आपका है। जैसा कि शुरू में एक मांग और आपूर्ति के बीच बड़ी खाई होगी, वैक्सीन ना लेकर आप दूसरों की मदद कर सकते हैं।

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सवाल 6: यदि मैं एक वरिष्ठ नागरिक या पहले से किसी बीमारी के साथ प्राथमिकता सूची की श्रेणी में आता हूं, तो मैं उचित टीकाकरण प्राधिकरण से कैसे संपर्क करूं?

जवाबः जल्द ही एक वेबसाइट और एक ऐप 'CoWIN' आएगा, जहां आप अपने संबंधित विवरणों के साथ पंजीकरण कर पाएंगे।

सवाल 7: CoWIN क्या है?

जवाबः यह दुनिया का पहला, डिजिटल, एंड टू एंड, वैक्सीन वितरण और मैनेजमेंट सिस्टम है। इसमें लाभार्थी पंजीकरण, प्रमाणीकरण, दस्तावेज सत्यापन, सत्र आवंटन, AEFI रिपोर्टिंग और प्रमाणपत्र निकलना शामिल है। वैक्सीन उपलब्ध होने के बाद, यह लाभार्थी को सूचित करने वाला एक एसएमएस भेजेगा। वैक्सीन केंद्र खुद पांच लोगों द्वारा मैनेज किया जाएगा और प्रति दिन अधिकतम 100 टीके लगाएगा। टीकाकरण के बाद व्यक्ति को केंद्र छोड़ने से पहले 30 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है।

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सवाल 8: निकट भविष्य में इस्तेमाल के लिए कितने प्रकार के कोरोना टीके उपलब्ध होने की संभावना है?

जवाबः भारत के सीरम इंस्टीट्यूट (ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका) द्वारा विकसित कोविशिल्ड एक नॉन-रेप्लिकेटिंग वायरल वेक्टर वैक्सीन है। ये वे वायरस हैं जिन्हें डिलीवरी सिस्टम के रूप में कार्य करने के लिए संशोधित किया गया है जो वायरल एंटीजन को हमारी प्रतिरक्षा कोशिकाओं (इम्यून सेल) तक ले जाते हैं। सीरम इंस्टीट्यूट वैक्सीन में कोरोना वायरस एंटीजेन डिलीवर करने वाला चिंपैंजी एडेनोवायरस इस्तेमाल किया गया है और रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-V जिसे डॉ रेड्डी लैब द्वारा भारत में बनाया गया है, में मानव एडेनोवायरस डिलीवर करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला वेक्टर है।

भारत बायोटेक इंडिया लिमिटेड द्वारा कोवैक्सिन, एक संपूर्ण सेल निष्क्रिय टीका है। बच्चों के टीकाकरण में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश वर्तमान टीके इस तकनीक द्वारा बनाए गए हैं। चूंकि ये मारे गए वायरस हैं, इसलिए ये इम्यूनिटी पैदा करते हैं, लेकिन बीमारी का कारण नहीं बन सकते हैं।

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फाइजर और मॉडर्ना संयुक्त राज्य अमरीका के हैं, जिसमें mRNA अणु होते हैं। ये कोड मैसेज ले जाते जो मानव कोशिका को कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन के निर्माण के लिए प्रेरित करता है। ये प्रोटीन एंटीबॉडीज का उत्पादन करने के लिए हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा पहचाने गए हैं। वहीं, अन्य भारतीय कंपनियां जैसे बायोलॉजिकल ई, कैडिला हेल्थकेयर और जेनोवा भी टीका विकास के उन्नत चरण में हैं।

सवाल 9: क्या मैं टीका लगने के बाद बिना मास्क के घूम सकता हूं?

जवाबः नहीं, अभी नहीं। ऐसा केवल तभी किया जा सकता है जब अधिकांश आबादी को या तो बीमारी हो गई हो या उन्हें टीका लग गया हो। इसका मतलब है कि आबादी ने झुंड प्रतिरक्षा (हर्ड इम्यूनिटी) विकसित कर ली है।

सवाल 10: क्या निकट भविष्य में नए और बेहतर कोविद टीके लगने की उम्मीद है?

जवाबः दिसंबर 2020 तक विभिन्न चरणों में 250 से अधिक टीके परीक्षण के अधीन हैं। नए वितरण तरीकों को भी विकसित करने के लिए बहुत सारे शोध चल रहे हैं। नैजल स्प्रे वैक्सीन शायद सबसे आशाजनक है। एक कई खुराक वाली नैजल स्प्रे डिवाइस बहुत सुविधाजनक और किफायती हो सकती है। यह लोकल IgA एंटीबॉडी पैदा करेगी और वायरस को प्रवेश पर ही रोक देगी। यह नाक में ही वायरस को रोकेगा और इस प्रकार बीमारी फैलने को भी रोकेगा।

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दुर्भाग्य से, चूंकि यह एक जीवित टीका होगा, इसलिए इसे अधिकतम और सबसे कठिन परीक्षणों की आवश्यकता होगी और इस तरह बाजार में आने में सबसे लंबा समय लगेगा।

बता दें कि कोई भी टीका 100 फीसदी सुरक्षा नहीं देता है। इसके अलावा एक टीका पाने वाले व्यक्ति में बीमारी बढ़ नहीं सकती है लेकिन वह इसे दूसरों तक पहुंचा सकता है। कृपया मास्क पहनना जारी रखें, फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करें और कुछ और समय तक हाथों को सैनेटाइज करना जारी रखें।

(नोटः उपरोक्त जानकारी विभिन्न रिपोर्टों, चिकित्सकों और सरकार द्वारा वक्त-वक्त पर जारी सूचनाओं के आधार पर है।)

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अमित कुमार बाजपेयी
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