
मूर्तियों को फाइनल टच देता कलाकार
27 सितंबर यानी आज से जिलेभर में गणेशोत्सव की शुरुआत होने जा रही है। भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना के साथ ही शहर से लेकर गांव तक माहौल भक्तिमय हो जाएगा। इस पर्व को लेकर तैयारियां चरम पर हैं। जगह-जगह पंडाल सजाए जा रहे हैं, लाइटिंग की व्यवस्थाएं की जा रही हैं और मूर्तिकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। गणेशोत्सव को लेकर इस बार एक खास पहल देखने को मिल रही है। अधिकांश स्थानों पर पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए शुद्ध मिट्टी की प्रतिमाएं बनाई गई हैं। प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियों को लेकर पर्यावरणविदों द्वारा लगातार विरोध के बाद अब कारीगर भी पारंपरिक और प्रकृति-सम्मत मूर्तियां बनाने की ओर बढ़ गए हैं।
स्थानीय मूर्तिकार बिहारी प्रजापति बताते हैं कि वे पिछले 20 वर्षों से गणेश प्रतिमाएं बना रहे हैं। इस बार भी उन्होंने केवल शुद्ध मिट्टी की प्रतिमाएं तैयार की हैं। वे कहते हैं हम रात-दिन काम कर रहे हैं। एक मूर्ति बनाने में लगभग 60 दिन लगते हैं। इसके लिए चिकनी मिट्टी को कपड़े से छानकर कंकड़ रहित किया जाता है, फिर धीरे-धीरे मूर्ति का आकार लेकर उसमें कलात्मक सजावट की जाती है।
बिहारी प्रजापति का कहना है कि मूर्तियां बनाने का सिलसिला गर्मियों से ही शुरू हो जाता है। एक फीट से लेकर नौ फीट तक की प्रतिमाएं इस बार तैयार हुई हैं, जिनकी कीमत 1000 रुपए से लेकर 13000 रुपए तक रखी गई है। हालांकि, इस बार मौसम की मार के कारण उत्पादन थोड़ा कम हुआ है, लेकिन भक्तों की जरूरतों को पूरा करने लायक प्रतिमाएं उपलब्ध हैं।
जिले में विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठन भव्य पंडाल तैयार कर रहे हैं। कई जगहों पर थीम आधारित झांकियां लगाई जा रही हैं, जिनमें धार्मिक कथाओं और सामाजिक संदेशों को दर्शाया जाएगा। विशेषकर युवा वर्ग उत्साहपूर्वक सजावट और आयोजन में हिस्सा ले रहा है।
गणेशोत्सव को लेकर प्रशासन भी सतर्क है। जगह-जगह सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात किया जाएगा। बड़े तालाबों और नदियों के किनारे अस्थाई नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाएंगे ताकि विसर्जन के दौरान किसी तरह की दुर्घटना न हो। नगर पालिका ने साफ-सफाई और विद्युत व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
गणेशोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्साह है। लोगों ने घर-घर पूजा की तैयारियां शुरू कर दी हैं। मिठाइयों, सजावटी सामान और पूजा सामग्री की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है। व्यापारी वर्ग भी इस त्योहार को लेकर उत्साहित है क्योंकि इससे बाजारों में रौनक लौट आई है। गणेशोत्सव का यह पर्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक समरसता और भाईचारे का भी प्रतीक माना जाता है। आगामी दस दिनों तक शहर और गांवों में गणपति बप्पा मोरया के जयघोष से माहौल गुंजायमान रहेगा।
Published on:
27 Aug 2025 10:29 am
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