Private Covid Hospitals के लिए जारी हुआ नया फरमान, अब नहीं वसूल सकेंगे अधिक बिल

Highlights:

-शासन ने बनाई निजी अस्पतालों की निगरानी के लिए तीन सदस्यीय कमेटी

-कमेटी निजी कोविड-19 अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता व अन्य बिंदुओं को परखेगी

-कमेटी अपनी रिपोर्ट शासन को देगी

-रिपोर्ट नकारात्मक होने पर मरीजों के उपचार की प्रक्रिया में फेरबदल किया जा सकता है

By: Rahul Chauhan

Published: 22 Nov 2020, 01:00 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

नोएडा। गौतमबुद्ध नगर जिले के निजी अस्पतालों में प्रोटोकॉल के तहत इलाज हो रहा है या नहीं और निजी अस्पताल मरीजों का ठीक से उपचार कर रहे हैं या नहीं, इस बात की निगरानी के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी शासन स्तर से बनाई गई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपक ओहरी ने बताया कि कोरोना वायरस की तीसरी लहर और गौतमबुद्ध नगर जिले में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी निजी कोविड-19 अस्पतालों में मरीजों के इलाज की गुणवत्ता तथा उचित इलाज व अन्य बिंदुओं को परखेगी। कमेटी अपनी रिपोर्ट शासन को देगी। रिपोर्ट नकारात्मक होने पर निजी कोविड-19 अस्पताल में मरीजों के उपचार की प्रक्रिया में फेरबदल किया जा सकता है।

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सीएमओ ने बताया कि जनपद में यथार्थ, फोर्टिस, कैलाश और जेपी आदि अस्पतालों में कोविड-19 के मरीजों का उपचार किया जा रहा है। इन अस्पतालों में मरीजों के उपचार की दर निर्धारित है। अस्पताल प्रबंधक प्रोटोकॉल के तहत ही मरीजों का इलाज करने का दावा करते हैं। लेकिन, कई बार यह शिकायत आती है कि अस्पताल प्रबंधन मरीजों का इलाज ठीक तरह से नहीं कर रहे हैं। इलाज का खर्च भी ज्यादा लेने की शिकायतें आ रही थीं। उन्होंने बताया कि इस शिकायत के चलते उत्तर प्रदेश शासन ने निजी अस्पतालों में मरीजों के इलाज की गुणवत्ता का मूल्यांकन करने का निर्णय लिया है।

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डॉ. दीपक ओहरी ने बताया कि शासन स्तर से बनाई गई कमेटी में जिलाधिकारी का एक प्रतिनिधि, मुख्य चिकित्सा अधिकारी का एक प्रतिनिधि तथा एक मेडिकल कॉलेज का प्रतिनिधि शामिल है। उन्होंने बताया कि टीम का मुख्य कार्य निजी कोविड-19 अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाले उपचार पर है। टीम के सदस्य समीक्षा के दौरान प्रत्येक अस्पताल में जाकर मरीजों को मिलने वाले इलाज की स्थिति देखेंगे। मरीजों से पूछेंगे कि उपचार के नाम पर मनमाना बिल तो तैयार नहीं किया जा रहा है। कुछ अस्पतालों में मरीजों को निश्चित समय अवधि गुजरने के बाद भी जबरन भर्ती किए जाने की शिकायत मिली है। उस संबंध में भी मरीजों से जानकारी ली जाएगी।

सीएमओ ने बताया कि कई निजी अस्पतालों में कोरोना वायरस की आरटी- पीसीआर और एंटीजन जांच के लिए ज्यादा पैसे वसूले जाने की शिकायते मिल रही हैं। वहीं, कुछ अस्पतालों में कोरोना की जांच व इलाज के बिल में ज्यादा वसूली की शिकायतें सामने आ रही है। इलाज के नाम पर लाखों रुपये का बिल अस्पताल में बनाया जा रहा है। यह बिल असली है या फर्जी, कमेटी इसकी भी जांच करेगी।

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