
कहावत है कि प्यास लगी तो कुआं खोदो... लगता है कि राजधानी रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के शासन-प्रशासन ने इसे अपना ध्येय वाक्य बना रखा है। हर साल ऐसा होता है कि गर्मी शुरू होते ही प्रदेशभर में पेयजल संकट गहराने लगता है और आमलोगों के सूखे कंठ पानी के टैंकरों के भरोसे हो जाते हैं। साल-दर-साल ये ही सिलसिला चल रहा है। राजधानी रायपुर का ही हाल देखें, तो यहां के 70 वार्डों में से कोई भी वार्ड ऐसा नहीं मिलेगा, जहां लोग जलसंकट से दो-चार नहीं हो रहे हों। हर वार्ड में 10 से 12 पॉइंट ऐसे हैं, जो ड्राई जोन में तब्दील हो चुके हैं यानी कि हर वार्ड की 10 से 12 इन जगहों पर पूरी तरह से पानी है ही नहीं। अगर इन क्षेत्रों में नगर निगम का टैंकर न पहुंचे, तो लोगों को पानी मिल ही नहीं पाएगा। रायपुर नगर निगम के पास 30 टैंकर हैं, जिनमें से करीबन 20 टैंकर मार्च महीने से ही जल आपूर्ति के लिए दौड़ा दिए गए हैं।
टैंकरों से जलापूर्ति की यह स्थिति तब है, जबकि अभी तो गर्मी का मौसम शुरू ही हुआ है। उस समय क्या होगा जब अप्रैल के आखिरी दिनों, मई और जून में सूर्यदेव आग उगल रहे होंगे..! गर्मियों में राजधानी की निचली बस्तियों में तो हर साल एक-एक बाल्टी पानी के लिए हर साल लड़ाई-झगड़ा और सिर फुटव्वल होता है। राजधानी रायपुर में ही जहां पूरा शासन-प्रशासन और सरकार बैठी हो, वहां जब पेयजल का यह हाल है तो अन्य शहरों-कस्बों के बारे में सोचिए क्या स्थिति होती होगी। और हां, गांवों के बारे में तो सोचिए ही मत, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में तो लगभग सालभर शुद्ध पेयजल नहीं के बराबर मिल पाता है।
हालांकि सरकार जल जीवन मिशन और अमृत जल मिशन के तहत हर घर में नल से जल पहुंचाने में लगी हुई है। सरकारी दावा भी है कि 90 प्रतिशत से अधिक घरों में नल से जल के लिए कनेक्शन कर दिया गया है। लेकिन, सिर्फ नल कनेक्शन से ही तो घरों में जल नहीं आ जाता है। सरकार को चाहिए कि वह वर्षा जल संरक्षण के साथ ही तेजी से गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए युद्ध स्तर पर कार्ययोजना बनाए और उसे सही तरीके से अमलीजामा भी पहनाए। साथ ही समाज भी इसमें अपनी अहम भूमिका निभाए। -अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com
संबंधित विषय:
Updated on:
10 Apr 2026, 2:35 AM IST
Published on:
10 Apr 2026, 2:35 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.