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संपादकीय: आइआइटी में इंटर कैंपस अध्ययन सार्थक पहल

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) में शुरू हुआ इंटर-कैंपस सेमेस्टर-लॉन्ग स्टूडेंट मोबिलिटी प्रोग्राम छात्रों को दूसरे IIT में एक सेमेस्टर पढ़ने का अवसर देगा। इससे क्रेडिट ट्रांसफर, बेहतर अकादमिक एक्सपोजर, बहु-विषयक अध्ययन और करियर अवसर बढ़ेंगे। यह पहल नई शिक्षा नीति के अनुरूप लचीलापन और गुणवत्ता दोनों को मजबूत करेगी।

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IIT Inter Campus Mobility Program

इंटर-कैंपस सेमेस्टर-लॉन्ग स्टूडेंट मोबिलिटी प्रोग्राम छात्रों को दूसरे IIT में एक सेमेस्टर पढ़ने का अवसर देगा।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) देश के इंजीनियरिंग परिदृश्य में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। दुनियाभर को अनगिनत बड़े इंजीनियरिंग ब्रेन देकर देशभर के प्रौद्योगिकी संस्थानों ने अपनी साख कायम की है। यह मुकाम निरंतर बनाए रखने के लिए किसी भी संस्थान को दुनियाभर में नित-नए होते जा रहे परिवर्तनों और प्रगति के साथ न सिर्फ कदमताल करनी होती है, बल्कि समय पर इनकी जरूरत को भांपते हुए उसके अनुरूप बदलाव भी करना पड़ता है। हमारे संस्थान इस आवश्यकता को काफी हद तक अच्छे से पूरा कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति से प्रेरित प्रौद्योगिकी संस्थानों में इसी साल से अपनाए जाने वाले इंटर कैंपस, सेमेस्टर-लॉन्ग स्टूडेंट मोबिलिटी प्रोग्राम, ऐसा ही नवाचार कहा जा सकता है।

इस प्रोग्राम की खासियत यह है कि यह आइआइटी के छात्र को अपनी पसंद की किसी अन्य आइआइटी में एक सेमेस्टर में अध्ययन करने की सुविधा प्रदान करेगा। वहां उसके जो क्रेडिट बनेंगे, वे उसके मूल आइआइटी में जुड़ जाएंगे। इसमें छात्र को लाभ यह है कि एक ही डिग्री में उसे दो आइआइटी की व्यवस्था का एक्सपोजर मिलेगा। इसमें दूसरा आइआइटी स्वाभाविक रूप से ऊंची रैंक का ही होगा। इसी ऊंची रैंक के आइआइटी के माहौल, संसाधनों तथा अपेक्षाकृत अधिक अनुभवी, दक्ष और प्रतिस्पर्धी प्रोफेसरों का सान्निध्य विद्यार्थी को बेहतर तरीके से पारंगत कर सकेगा। इसका असर सिर्फ उस सेमेस्टर विशेष तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यार्थी के पूरे अध्ययनकाल को एक अलग ही स्तर पर ले जाएगा, इसकी भी पूरी उम्मीद रहेगी।

अभी भारत की कुछ देशों से संधि है, जिसके तहत उनके शैक्षणिक संस्थानों के साथ आदान-प्रदान की प्रक्रिया चलती है। देश के आइआइटी संस्थानों में इस तरह की प्रक्रिया लागू करने का यह पहला अवसर होगा। इस व्यवस्था में सभी आइआइटीज में अकादमिक सहयोग बढ़ाने और छात्रों के लिए डिग्री में लचीलापन लाने का उसका उद्देश्य पूरा होगा। पहले साल में कुछ बड़े आइआइटीज के साथ यह नवाचार शुरू होना है। धीरे-धीरे इसे सभी आइआइटीज में लागू किया जाना चाहिए। आज की जरूरत के हिसाब से एक से ज्यादा सेमेस्टर तथा समान ब्रांच के सेमेस्टर से आगे दूसरी ब्रांच के सेमेस्टर की सुविधा देने के बारे में भी सोचा जाना चाहिए।

अब भी कई छात्र अपनी स्ट्रीम से हटकर दूसरी स्ट्रीम का अध्ययन करते हैं और उसे कॅरियर भी बनाते हैं, लेकिन यह सब कुछ उन्हें अपने स्तर पर करना होता है। इसमें उन्हें अपनी मूल स्ट्रीम तो पूरी करनी ही होती है। अधिकृत तौर पर दूसरे आइआइटी में दूसरी स्ट्रीम की पढ़ाई की सुविधा मिलेगी, तो यह छात्रों के लिए ज्यादा हितकारी होगा। यह छात्रों को परिपूर्ण इंजीनियर बनाने का मार्ग प्रशस्त कर उनके लिए अलग-अलग क्षेत्र में रोजगार के अनेक द्वार खोलने में सहायक होगी।