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भारत को चाहिए ओलंपिक के लिए नई रणनीति

130 करोड़ से ज्यादा की आबादी और ओलंपिक में गिनती के पदक। हमारे प्रदर्शन का स्तर सुधारने का जिम्मा कौन लेगा? प्रदर्शन में सुधार के लिए बुनियादी स्तर से ही ध्यान दिए जाने की जरूरत है, तभी भारत ओलंपिक के शीर्ष पांच देशों में एक बन सकेगा।

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Siddharth Kothari

Aug 08, 2021

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- सिद्धार्थ कोठारी

भारत दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था जो एक दशक में शीर्ष तीन में होने का अनुमान है। आर्थिक ताकत के लिहाज से सकल घरेलू उत्पाद (पीपीपी- परचेंजिंग पावर पैरिटी) के पैमाने पर 189 देशों में तीसरे स्थान पर है। अरबपतियों के मामले में 71 देशों में तीसरे स्थान पर। विदेशी मुद्रा भंडार दुनिया में शीर्ष पांच में शामिल। ओलंपिक में 13 साल बाद स्वर्ण पदक की उम्मीद भी पूरी हुई है। लेकिन यह सवाल अब भी है कि ऐसा क्या है जो भारत को ओलंपिक में रोक रहा है? क्या प्रतिभाओं की कमी है या अवसरों की या फिर ओलंपिक जीतने की कमजोर रणनीति हमें रोक रही है?

ओलंपिक में शामिल विभिन्न खेलों और उनकी स्पर्धाओं पर नजर डालेंगे तो हमारी जीत की उम्मीदें बढ़ती दिखाई देंगी। इस बार 33 खेलों में 339 स्पर्धाएं हैं। जैसे-जैसे स्पर्धाएं बढ़ती हैं, वैसे-वैसे प्रत्येक में स्वर्ण, रजत और कांस्य की संख्या भी बढ़ जाती है। ज्यादा स्पर्धाओं वाले खेलों में पदक जीतने के कई गुना अवसर बढ़ते हैं। सात खेलों की स्पर्धाओं और उनके पदकों की संख्या पर नजर डालें तो पाएंगे कि एक्वेटिक्स (तैराकी व अन्य) में 49 स्पर्धाएं और कुल 147 पदक, एथलेटिक्स में 48 स्पर्धाएं और 144 पदक, साइकिलिंग में 22 स्पर्धाएं और 66 पदक, जिमनास्टिक में 18 स्पर्धाएं और 54 पदक, निशानेबाजी में 15 स्पर्धाएं और 45 पदक व भारोत्तोलन में 14 स्पर्धाएं और 42 पदक व कुश्ती में 18 स्पर्धाएं और कुल 54 पदक। इन सात खेलों की स्पर्धाएं ओलंपिक की स्पर्धाओं का लगफग 54 प्रतिशत है। बाकी 26 खेल स्पर्धाओं में यह हिस्सेदारी करीब 46% है।

ओलंपिक पदक तालिका में शनिवार रात तक शीर्ष दो के रूप में अमरीका व चीन का बोलबाला था। ऐसा क्या है कि इनकी झोली में इतने पदक जा रहे हैं? यहां एक स्मार्ट रणनीति का पैटर्न दिखता है। टोक्यो में चीन के पदकों में लगभग 56% हिस्सेदारी डाइविंग, भारोत्तोलन, जिमनास्टिक, टेबल टेनिक, निशानेबाजी जैसे पांच खेलों की रह है। शनिवार रात 10.30 बजे तक चीन के 87 में से 26 स्वर्ण समेत 49 पदक इन्हीं पांच खेलों से आए। अमरीका को लगभग 66% पदक पांच खेलों- डाइविंग, एथलेटिक्स, जिमनास्टिक, तैराकी और निशानेबाजी से मिले हैं। 30 पदक तो अकेले तैराकी से और 26 एथलेटिक्स से। अमरीका के 36 स्वर्ण पदकों में से 11 तैराकी की बदौलत हैं।

एक और रणनीति महिला खिलाड़ियों को लेकर दिख रही है। चीनी दल में 70% से अधिक महिलाएं हैं और उसके करीब 53% पदकों का श्रेय महिला विजेताओं को जाता है। अमरीका के 108 कुल पदकों में से महिलाओं ने 63 पदक यानी लगभग 58% जीते हैं। भारत ने सात पदक जीते हैं जिनमें से तीन का श्रेय महिला खिलाड़ियों को है। इस बार आइओसी की थीम भी जेंडर समानता थी इसलिए महिला खिलाड़ियों की ज्यादा भागीदारी रही।

रणनीतिक कदम के रूप में उन खेलों का चुनाव भी हो सकता है जो ज्यादा प्रचलित नहीं है और पदक जीतने की संभावना अधिक होती है। साइकिलिंग बीएमएक्स फ्रीस्टाइल में केवल 11 देशों के 18 प्रतिभागियों ने भाग लिया। स्पोर्ट्स क्लाइम्बिंग में 19 देशों से 40 प्रतिभागी हैं। यहां खेलों में बजट व बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा भी है।

एक विकल्प खेल विशेष केन्द्रों का भी हो सकता है। क्या कुछ खेलों को विकसित करने की जिम्मेदारी राज्यों को सौंपी जा सकती है? यह खेलों से जुड़ी उस राज्य या शहर की विशिष्टता के अनुसार हो सकता है। हॉकी के लिए पंजाब या उड़ीसा, भारोत्तोलन के लिए पूर्वोत्तर राज्य या हरियाणा, फुटबॉल के लिए पश्चिम बंगाल या दक्षिण के राज्य। इन विशिष्ट अकादमी में ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए देशभर से सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाएं तैयार हो सकेंगी, अगर अगले ओलंपिक तक नहीं तो उसके आगे वालों में।

130 करोड़ से ज्यादा की आबादी और ओलंपिक में गिनती के पदक। हमारे प्रदर्शन का स्तर सुधारने का जिम्मा कौन लेगा? देश के कॉर्पोरेट जगत ने दिखा दिया है कि वह परिणाम देने में सक्षम है। क्यों न एक-एक खेल का स्तर सुधारने और देश को चैंपियन देने की जिम्मेदारी कॉर्पोरेट क्षेत्र को दे दी जाए। ये योग्य विशेषज्ञों व प्रशिक्षकों की बेहतर व्यवस्था कर सकते हैं। आइपीएल ने राज्यों के क्रिकेटरों को नए अवसर दिए हैं। ओलंपिक में भारत शीर्ष पांच में क्यों न छाए? प्रति व्यक्ति जनसांख्यिकीय आधार पर प्रतिभाएं तराशने से पहले कुछ सवालों के जवाब जरूरी हैं। जिस तरह राजमार्ग व बांध बनाए जाते हैं तो खेलों व प्रतिभाओं का समर्थ करने वाला बुनियादी ढांचा भी सुदृढ़ किया जाए। खेल चरित्र के साथ खेल भावना का निर्माण करते हैं। जाति-धर्म से ऊपर उठकर एकजुटता लाते हैं। खेल देशवासियों को जीत की प्रेरणा देकर एक धागे से बांधते हैं। क्या देश के विकास की बुनियाद केवल इमारतों के ढांचों पर ही रखी जाती रहेगी या इसमें नागरिक भी ध्वजवाहक बनेंगे।

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