यही कारण है कि बांसवाड़ा जैसे जिलों में तीन महीनों में ही मानव दिवस 76 प्रतिशत तक गिर गए। पिछले पांच वर्षों में बजट घटा, श्रमिकों की संख्या 46.5 प्रतिशत घटी और औसत मानव दिवस भी लगातार नीचे आया। यह संकट सिर्फ आर्थिक ही नहीं, सामाजिक भी है। पलायन से गांवों का सामाजिक ढांचा टूटता है। बच्चों की पढ़ाई छूटती है, महिलाओं की सुरक्षा प्रभावित होती है और बुजुर्ग अकेले रह जाते हैं। क्या यही 'विकसित भारत' की तस्वीर है? रोजगार की गारंटी देने वाली किसी भी योजना को पूरी तरह से मांग आधारित बनाना होगा।