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आपकी बात, क्या देश में समान नागरिक संहिता लागू की जानी चाहिए?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

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Patrika Desk

Dec 12, 2022

आपकी बात, क्या देश में समान नागरिक संहिता लागू की जानी चाहिए?

आपकी बात, क्या देश में समान नागरिक संहिता लागू की जानी चाहिए?

जटिल है प्रक्रिया
एक देश एक कानून की तर्ज पर समान नागरिक संहिता समय की मांग है। इससे धर्म, जाति , वेशभूषा के कारण देश में होने वाले भेदभाव भी कम होंगे। महिलाओं के लिए यह मील का पत्थर साबित होगी। मानव अधिकारों की रक्षा होगी। प्रक्रिया जटिल है, किंतु समान नागरिक संहिता समय की मांग है।
-एकता शर्मा, जयपुर
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महिलाओं के हितों की रक्षा होगी
देश में समान नागरिक संहिता लागू होनी चाहिए। इससे अल्पसंख्यकों और महिलाओं के हितों कि रक्षा भी होगी। साथ ही सबके लिए कानून भी समान होगा।
-आर्यन वीर, सूरतगढ़
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जरूरी है लागू होना
स्वतंत्रता के इतने वर्षों के बाद भी जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग अपने मूलभूत अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। समान नागरिक संहिता लागू न होना एक प्रकार से विधि के शासन और संविधान की प्रस्तावना का उल्लंघन है।
-गोपाल रैकवार, मनेंद्रगढ, छत्तीसगढ़
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जन जागरूकता जरूरी
समान नागरिक संहिता न होना समानता के मौलिक अधिकार के खिलाफ है। इससे रूढि़वादिता को बढ़ावा मिलता है। इसका निर्माण करते समय सावधानी जरूरी है। इसे लागू करने से पहले इसके संबंध में जन जागरूकता पैदा करना जरूरी है।
- कपिल एम. वडियार, जोधपुर
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सबके लिए एक कानून
अनेकता में एकता संविधान की खुशबू है, जिसमें विगत कुछ वर्षों से ह्रास होता प्रतीत हो रहा है। देश के समस्त नागरिकों के लिए मूलभूत नियम कानून समान होने से आपसी सौहार्द और आपसी अपनेपन में नि:संदेह इजाफा होगा।
-मुकेश भटनागर, वैशालीनगर, भिलाई
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एक देश, एक नागरिक संहिता
विश्व में ऐसा कोई देश नहीं है, जहां अलग-अलग नागरिक संहिता हो, परन्तु भारत ही एक ऐसा देश है जहां मजहब अनुसार नागरिक संहिता है। इसके कारण भारतवर्ष में अराजकता का माहौल बना रहता है। देश में शांति और आपसी प्रेम- भाव बनाए रखने के लिए एक देश एक नागरिक संहिता की सख्त आवश्यकता है।
कैलाश चन्द्र मोदी, सादुलपुर, चूरु
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एकता होगी मजबूत
अलग-अलग धर्मों के अलग कानून होने से न्यायपालिका पर बोझ पड़ता है। समान नागरिक संहिता लागू होने से इस परेशानी से निजात मिलेगी और अदालतों में वर्षों तक चलने वाले मामलों के फैसले जल्द होंगे। हर धर्म के लोगों के लिए कानून में एक समानता से देश में एकता बढ़ेगी।
-प्रतीक्षा, रायपुर छत्तीसगढ़
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कानून कायदे एक हों
जब देश एक है, तो यहां के नियम ,कानून या कायदे भी एक ही होने चाहिए। किसी जाति या संप्रदाय विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए दोहरे कानून से वर्ग संघर्ष बढ़ता है, मनमुटाव पैदा होता है। इसलिए समान नागरिक संहिता लागू किया जाना चाहिए।
-रामेश्वर लाल आमेटा, राजसमन्द
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मजबूत होगी राष्ट्रवादी भावना
वर्तमान में मौजूद सभी व्यक्तिगत कानूनों में पक्षपात की समस्या है, जिसे समान नागरिक संहिता लागू करके दूर किया जा सकता है। समान नागरिक संहिता से देश में राष्ट्रवादी भावना को बल मिलेगा। इसलिए समान नागरिक संहिता देश में लागू होना बहुत जरूरी है.।
-तरुणा साहू, राजनांदगांव छत्तीसगढ़
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पैदा होगी अस्थिरता
भारत अखंड काल से विविधता का देश रहा है। समान नागरिक संहिता सिफ एक धर्म विशेष को लक्ष्य करके लाई जा रही है। इसे नहीं लाया जाना चाहिए। इससे देश में अस्थिरता पैदा होगी।
-फजल अकबर जई, भोपाल, मप्र

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