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भूकंप की त्रासदी के बीच नजर आया दुनिया को बचाने का मंत्र

क्या बात-बात पर अपनी ताकत के दंभ में संपूर्ण मानव समाज के सपनों को संहार की चुनौती देने वाले लोग इस सच को सहजता से स्वीकार कर सकेंगे कि अंतत: प्रेम ही संसार की सारी उम्मीदों को बचाएगा।

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Patrika Desk

Feb 13, 2023

भूकंप की त्रासदी के बीच नजर आया दुनिया को बचाने का मंत्र

भूकंप की त्रासदी के बीच नजर आया दुनिया को बचाने का मंत्र

अतुल कनक
लेखक और साहित्यकार

बसंत ऋतु पृथ्वी पर जीवन की नई उमंगें लाती है, लेकिन इस बार जब भारत में बसंत के आगमन का उल्लास था, दुनिया के एक हिस्से ने प्रकृति का क्रूर रूप देखा। 5 फरवरी को भारत में बसंत पंचमी का पर्व मनाया गया और 6 फरवरी को तुर्की और सीरया में विनाशकारी भूकंप आया। भूकंप में हजारों लोगों के मारे जाने की खबर है। इन्हीं दिल दहला देने वाली खबरों के बीच कुछ खबरें ऐसी भी सामने आई हैं, जो प्रेम के प्रति मनुष्य की आस्था को बढ़ाती हैं।
एक मकान के मलबे के नीचे दो भाई दबे हुए थे। बड़े भाई की उम्र मुश्किल से दस साल रही होगी। इस रूह कंपा देने वाले हादसे में भी बड़े भाई को अपने छोटे भाई की चिंता थी, जो उसी के पास मलबे के नीचे दबा हुआ था। किस्मत से इतना बड़ा हादसा भी दोनों की जान नहीं ले सका। लोगों का दिल यह देखकर संवेदनाओं से भर गया कि मलबे के नीचे दबे होने के बावजूद बड़े भाई ने अपने हाथ को छोटे भाई के सिर पर इस तरह रखा हुआ था, ताकि उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचे। अपनी जान आफत में होने के बावजूद किसी आत्मीय की जान बचाने की चिंता केवल प्रेम कर सकता है और बसंत की ऋतु प्रतीकात्मक तौर पर यही तो समझाने आती है कि केवल प्रेम ही दुनिया को बचा सकता है। पाब्लो नेरुदा की एक प्रसिद्ध कविता है -'मैं/ तुम्हारे साथ/ वही करना चाहता हूं/ जो बसंत/ गुलाब के साथ करता है।Ó बसंत गुलाब को उसके अस्तित्व के संपूर्ण पल्लवन के अनुकूल परिस्थितियां प्रदान करता है। प्रेम जब अपने सबसे प्रांजल रूप में होता है, तो वह किसी कलुश की चिंता नहीं करता। यही भावना जब व्यष्टि से समष्टि की ओर अग्रसर होती है, तो वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना बन जाती है। यही भावना पूरे उत्साह के साथ अपनी प्रार्थनाओं में कहती है -'सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया:।Ó संसार के सभी लोग सुखी हों, संसार में सभी स्वस्थ रहें। तुर्की में आए इस भूकंप के बाद मानवीय संवेदनाओं और प्रेम के कुछ कूटनीतिक रूप भी देखने को मिले। कोरोना काल में और उसके बाद भी तुर्की और यूनान पूर्वी भूमध्यसागर में स्थित एजियन द्वीप समूह को लेकर आमने-सामने दिखे। भूकंप ने जैसे ही तुर्की को निशाना बनाया यूनान ने तुरंत मदद के लिए हाथ आगे बढ़ा दिए। यूनानी राहत दल तुर्की के आपदा प्रभावित इलाकों में लगातार काम कर रहे हैं। यूनान ही क्यों, भारत ने भी तुर्की की पिछली हरकतों को क्षमा करते हुए बड़प्पन दिखाया और राहत दल भेजे हैं। उल्लेखनीय है कि तुर्की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करता रहा है।
बसंत प्रेम की ऋतु है। यह दुर्योग है कि 14 फरवरी को दुनिया में प्रेम का एक बड़ा उत्सव वेलेंटाइन दिवस मनाया जाता है, उसके कुछ दिन बाद ही पिछले वर्ष रूस ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध की शुरुआत की। इस युद्ध को एक साल पूरा होने जा रहा है, लेकिन दोनों देशों की जोर-आजमाइश जारी है। युद्ध में सबसे ज्यादा परेशान वह आम आदमी होता है, जो अपने सपनों को संवारने के लिए सतत साधनारत रहता है।
एक शेर है, 'दुश्मनी का सफर कदम, दो कदम/ तुम भी थक जाओगे, हम भी थक जाएंगे।Ó क्या बात-बात पर अपनी ताकत के दंभ में संपूर्ण मानव समाज के सपनों को संहार की चुनौती देने वाले लोग इस सच को सहजता से स्वीकार कर सकेंगे कि अंतत: प्रेम ही संसार की सारी उम्मीदों को बचाएगा।

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