पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।
वक्त की पुकार
विपक्षी दल नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह को विवाद का विषय न बनाएं। संसद भवन कोई आम भवन नहीं है, अपितु इसकी भी अपनी गरिमा व ऐतिहासिक गौरव है। उद्घाटन राष्ट्रपति करें या प्रधानमंत्री दोनों ही देश के सर्वोच्च पद पर आसीन हंै और किसी भी पद को दूसरे पद से कम आंकना छोटी मानसिकता का प्रतीक हैं। अत: वोटों की राजनीति को छोडकर खुशी-खुशी सभी दल नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में भाग लेकर लोकतंत्र को मजबूत करें। यही वक्त की पुकार है।
-सुनील कुमार माथुर, जोधपुर
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संसद लोकतंत्र की आत्मा
राष्ट्रपति हमारे देश के संवैधानिक प्रमुख और प्रथम नागरिक हैं। संसद एक भवन मात्र नहीं है, यह लोकतंत्र का प्रतीक है। तो खुद सभापति और प्रधानमंत्री का कर्तव्य है कि वे नए संसद भवन का उद्घाटन करने राष्ट्रपति को आमंत्रित करें। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों का उद्घाटन समारोह का बहिष्कार जायज है।
- शोभा बनसोड, भैंसदेही, म.प्र.
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सत्ता पक्ष का रवैया
विपक्ष सदैव सत्ता पक्ष के विरोध में रहता है, लेकिन वर्तमान में सत्ता पक्ष रवैया गलत है। इससे विपक्ष ही पीडि़त नहीं है, बल्कि देश की जनता भी पीडि़त है।
-नरेश कुमार, सवाई माधोपुर
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राष्ट्रपति को ही करना चाहिए उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई को नए संसद भवन का उद्घाटन करेंगे। विपक्षी दलों का मानना है कि उनकी बजाय राष्ट्रपति को उद्घाटन करना चाहिए क्योंकि राष्ट्रपति भारत के प्रथम नागरिक और संसद के प्रमुख हैं। राष्ट्रपति के पास किसी भी सदन को बुलाने और सत्रावसान की शक्ति है। संसद भंग करने की शक्ति भी राष्ट्रपति के पास है। ऐसे में भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति से कराया जाना चाहिए।
- रोशन पाटीदार, पारड़ा-सरोदा , डूंगरपुर
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संवैधानिक पद का अपमान
कांग्रेस सहित कई दल नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार कर रहे हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि पीएम नहीं, बल्कि राष्ट्रपति को इस भवन का उद्घाटन करना चाहिए। ऐसा नहीं होना सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान है। वहीं इस दिन को सावरकर की जयंती से जोड़कर देखा जा रहा है।
- देवेन्द्र जारवाल, जयपुर
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बहिष्कार करना ठीक
नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह का विपक्षी दलों द्वारा बहिष्कार करना बिल्कुल लाजमी है। सवाल यह है कि नए संसद भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री क्यों कर रहे हैं? इसका उद्घाटन राष्ट्रपति के हाथों ही करवाना चाहिए। अगर कांग्रेस या किसी दूसरे दल का प्रधानमंत्री होता, तो भाजपा वाले उनको उद्घाटन करने देते क्या?
अर्जुन सिंह बारड़, अनादरा सिरोही
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सकारात्मक भूमिका निभाए विपक्ष
संसद भवन लोकतंत्र का पवित्र मंदिर है। उद्घाटन के पावन प्रसंग पर विपक्ष को सारे मुद्दों को गौण कर 140 करोड़ भारतीयों के साथ खड़ा होना था। अब बहिष्कार की नीति से ऊपर उठकर विपक्ष को भविष्य में सकारात्मक भूमिका में आना चाहिए। लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह जरूरी है।
-अभय कुमार बांठिया, बंगलूरु
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दोहरी मानसिकता
विपक्षी दल संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से करवाने की मांग कर रहे ैंहैं। इनमें से कई ऐसे विपक्षी दल भी हैं, जो राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी बनाए जाने पर द्रौपदी मुर्मू का विरोध भी कर रहे थे। यह दोहरी मानसिकता है।
-संजय डागा, हातोद
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