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यहां जमीन की नमी नेे किसानों की बढ़ाई आस, सेवज फसल की ओर रुझान

locationपालीPublished: Dec 01, 2023 11:08:18 am

Submitted by:

Suresh Hemnani

पाली जिले के जवाई कमाण्ड क्षेत्र में सेवज फसलों का बढ़ा क्षेत्र

यहां जमीन की नमी नेे किसानों की बढ़ाई आस, सेवज फसल की ओर रुझान
चने की फसल
बिपरजॉय तूफान में हुई भारी बारिश के बाद पाली जिले के जवाई कमांड सहित अन्य क्षेत्रों के खेतों में चने, रायडा, तारामीरा और अरण्डे की अगेती फसल बुवाई के लिए पर्याप्त नमी बनी रही। इसके बाद कई किसानों ने नवरात्रि के समय खेतों में इन फसलों की बुवाई की है। यहां चने की फसल की बुवाई अधिक हुई है। यहां अब यह फसल करीब डेढ़ माह की हो चुकी है। किसानों का कहना है कि इस बार नमी के कारण चने की फसल सेवज होगी। इसमें सिंचाई करने की जरूरत नहीं है और अगेती होने के कारण बम्पर पैदावार होने की उम्मीद बंधी है।
ये होती है सेवज फसल
यह फसल उपजाऊ मिट्टी वाले खेत या जलभराव वाले क्षेत्रों में होती है। बारिश के समय खेतों में तीन चार बार अच्छी जुताई कर पाटा लगा कर रख दिया जाता है ताकि खेत में नमी बनी रहे। उसके बाद अक्टूबर माह में कम सिंचाई वाली फसलों की बुवाई की जाती है। मौसम अनुकूल रहने पर सिंचित फसलों के बराबर सेवज फसलों का उत्पादन होता है।
चाही किस्म के खेत भी हरे भरे तखतगढ सहित आसपास के गांवों में इस बार चाही किस्म के खेतों में भी अधिकतर चने की फसल की बुवाई हुई है। इन खेतों में सिंचाई के साधन उपलब्ध होने के कारण पूर्व में इन्हें जवाई कमांड क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया था।
दीमक का प्रकोप
कई खेतों में चने की फसल में दीमक के कारण नुकसान भी हो रहा है। पौधे सूख कर खराब हो रहे हैं। वहीं चने की पत्तियों के रंग जैसी महिन लटें भी नुकसान पहुंचा रही हैं।
इन्होंने कहा...
-मुझे करीब 50 वर्ष का खेती का अनुभव है। जिस वर्ष यहां बारिश के मौसम में अधिक बारिश हुई उस समय खरीफ फसलों की बुवाई नहीं कर सके। कई बार जवाई बांध के जलग्रहण क्षेत्र में भी कम बारिश के कारण नहर नहीं आई। ऐसे में खेत में तीन चार बार जुताई करने के बाद चने की बुवाई करते हैं। सेवज चने की फसल में यहां मौसम अनुकूल होने पर प्रति बीघा 4 क्विण्टल के करीब उत्पादन होता है। -बजरंगसिंह जोधा, तखतगढ़
-जवाई नहर से पूरे खेत में सिंचाई नहीं होती है। हमेशा खाद बीज डाला हुआ खेत खाली रह जाता है। इस बार ज्यादा बारिश के कारण नमी बनी रही इसलिए सेवज चना बोया है। इसमें सिंचाई की जरूरत नहीं है। अब शेष जमीन में गेहूं की बुवाई करेंगे। -जितेन्द्रसिंह, राजपुरा
-इस बार खेतों में नमी के कारण किसानों ने सेवज चने की फसल की बुवाई की है। यहां करीब 1600 हैक्टेयर जमीन में चने की फसल है। -मंगलाराम, कृषि पर्यवेक्षक, तखतगढ़

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