लॉकडाउन के साइड इफैक्ट: बेरोजगारी बढऩे और नशे के कारण बढ़ रही घरेलू हिंसा

सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन ने सात राज्यों की महिलाओं से किया मंथन
अब केंद्र सरकार को भेजी जाएगी रिपोर्ट

By: Devkumar Singodiya

Published: 17 May 2020, 09:18 PM IST

पानीपत/चंडीगढ़. लॉकडाउन के कारण भले ही कोरोना को बढऩे से रोक लिया गया है, लेकिन लॉकडाउन के कारण किसी का रोजगार छिन गया है तो कोई नशे का आदी हो गया है। परिणामस्वरूप घरेलू हिंसा में वृद्धि हो गई है। घरेलू हिंसा के मामलों में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, दिल्ली, बिहार और महाराष्ट्र टॉप राज्यों में शामिल हैं।

सेल्फी विद डॉटर फांउडेशन की वेबिनार में महिलाओं के प्रति हुई घरेलू हिंसा पर बेहद चिंता जाहिर की गई। हरियाणा के जींद जिले के बीबीपुर गांव के पूर्व सरपंच सुनील जागलान इस फाउंडेशन के संयोजक हैं। डिजीटल मोड के जरिए हुए इस राष्ट्रीय वेबिनार में हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और राजस्थान की महिलाएं तथा बुद्धिजीवी लोग जुड़े।

सुप्रीम कोर्ट की सीनियर एडवोकेट एवं निर्भया कांड की अधिवक्ता सीमा समृद्धि ने महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए आयोजित किए जाने वाली परिचर्चाओं की जरूरत पर जोर दिया। राजस्थान की आईपीएस अधिकारी एवं कोटा एसपी सिटी डॉ. अमृता दूहन ने कहा कि सिर्फ पिटाई को घरेलू हिंसा नहीं माना जाना चाहिए। महिलाओं के प्रति गलत भाषा का इस्तेमाल, गलत आचरण और आर्थिक तंगी के साथ अपमान घरेलू हिंसा का पार्ट हैं। ग्रामीण इलाकों में महिला सरपंच समूह बनाकर महिलाओं को उनके हितों के प्रति जागरूक बना सकती हैं।

बॉलीवुड की फिल्म डायरेक्टर एवं प्रोड्यूसर विभा बख्शी ने कहा कि घरेलू हिंसा किसी एक की समस्या नहीं है। महिलाओं के प्रति पुरुषों को अपनी सोच में बदलाव करना होगा। 90 फीसदी आबादी महिलाओं के प्रति बायस्ड है। आरजे दिव्या ने कहा कि घर पर रहते हुए महिलाओं की बात को अनसुना करना भी घरेलू हिंसा की श्रेणी में आता है।


पुरानी परम्पराएं भी लॉकडाउन ही हैं

वरिष्ठ पत्रकार अनुराग अग्रवाल ने रोजगार की चिंता, तनाव और आपसी नासमझी को महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा की वजह बताया। सुप्रीम कोर्ट बार के सदस्य संदीप राठी ने कहा कि अदालतों में अर्जेंट केस की सुनवाई हो रही है। इसलिए किसी महिला को न्याय का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। पत्रकार दिनेश भारद्वाज ने कहा कि हरियाणा के ग्रामीण अंचल में आज भी पुरानी परंपराओं के चलते अधिकतर महिलाएं अपने जीवन का अधिकतर हिस्सा लॉकडाउन में ही व्यतीत करती हैं।

गौरव पांचाल ने लॉकडाउन में बिकी अवैध शराब को घरेलू हिंसा की बड़ी वजह बताया। महाराष्ट्र की कृष्णा वानखेड़े ने कहा कि महिलाएं भले ही अपने उत्पीडऩ की कहीं रिपोर्ट दर्ज न कराएं, मगर उनका समाधान जरूरी है। इसके लिए काउंसलर नियुक्त किए जाने चाहिएं। मेवात से पूजा ने कहा कि महिला का सोशलेजाइशेन करना ठीक नहीं है। गुरुग्राम की निर्मला ने न्याय के लिए पिछले 13 साल से लड़ी जा रही लड़ाई का जिक्र किया, जिस पर फाउंडेशन के अध्यक्ष सुनील जागलान ने उनकी लड़ाई लडऩे का ऐलान किया।



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