
झांसी की रानी।
जब भी 1857 की क्रांति का जिक्र होता है, लोगों के जहन में एक अद्भुत तस्वीर उभरती है। वह तस्वीर है पीठ पर अपने पुत्र को बांधकर, अंग्रेजों के सीने को चीरते हुए अपना रास्ता बना रही झांसी की रानी की। यह छवि वीरता, साहस और मातृभूमि के प्रति समर्पण की पराकाष्ठा को दर्शाती है। सुभद्रा कुमारी चौहान की मशहूर पंक्तियां, 'बुंदेलों हर बोलो के मुंह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी, वो तो झांसी वाली रानी थी,' आज भी हर भारतीय में जोश भर देती हैं। रानी लक्ष्मीबाई केवल एक योद्धा नहीं थीं, बल्कि वह एक ऐसी असाधारण महिला थीं, जिसने अपनी नीतियों और असाधारण प्रतिभा से दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य की नींव हिला दी। आज भी वह महिला सशक्तिकरण की प्रतीक हैं, जिनकी कहानी सदियों तक प्रेरणा देती रहेगी।
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