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गांव के प्रधान के पास साल में कितना पैसा आता है? बजट कैसे बनता है और पैसा कहां खर्च होता है?

Gram Panchayat Budget : जानिए ग्राम प्रधान को साल में कितना फंड मिलता है, ग्राम पंचायत का बजट कैसे तैयार होता है और विकास कार्यों के लिए मिलने वाला पैसा कहाँ और कैसे खर्च किया जाता है।
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Gram Panchayat Budget

Gram Panchayat Budget : कितना होता है ग्राम पंचायत का बजट, PC- Chatgpt

जब गांव में सड़क बनती है, नाली बनती है, स्ट्रीट लाइट लगती है या पंचायत भवन की मरम्मत होती है, तो अक्सर लोग कहते हैं कि 'प्रधान के पास तो करोड़ों रुपये आते हैं।' लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा जटिल है। ग्राम प्रधान के पास कोई एक तय रकम नहीं आती, बल्कि ग्राम पंचायत का बजट केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाओं, वित्त आयोग अनुदान और स्थानीय आय से मिलकर बनता है।

भारत में पंचायतों को मिलने वाला पैसा भी पूरी तरह प्रधान के विवेक पर नहीं होता। अधिकांश राशि विशेष योजनाओं और तय नियमों के तहत खर्च की जाती है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि पंचायत का बजट और प्रधान की स्वतंत्र खर्च करने की शक्ति दो अलग-अलग चीजें हैं।

पंचायत को पैसा कहां-कहां से मिलता है?

15वां वित्त आयोग: सबसे बड़ा नियमित स्रोत

ग्राम पंचायतों के लिए सबसे महत्वपूर्ण फंड 15वें वित्त आयोग का अनुदान है। वित्त आयोग ने 2021-26 की अवधि के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों (Rural Local Bodies) को लगभग 2.36 लाख करोड़ रुपये देने की सिफारिश की है।

इस अनुदान को दो हिस्सों में बांटा गया है। टाइड ग्रांट का जो हिस्सा है उसे 60 प्रतिशत दिया गया है। वहीं अनटाइड ग्रांट को 40 प्रतिशत हिस्सा दिया गया है।

टाइड ग्रांट केवल पेयजल और स्वच्छता जैसे कार्यों पर खर्च की जा सकती है, जबकि अनटाइड ग्रांट का उपयोग पंचायत स्थानीय जरूरतों के अनुसार कर सकती है।

कई बार किसी पंचायत में पेयजल और स्वच्छता से जुड़े लक्ष्य पहले ही अन्य योजनाओं के जरिए पूरे हो चुके होते हैं। ऐसी स्थिति में टाइड ग्रांट का उपयोग नहीं हो पाता और इसे किसी दूसरे काम में भी नहीं लगाया जा सकता। संसद की एक स्थायी समिति ने 2025 में सुझाव दिया था कि ऐसी स्थिति में टाइड ग्रांट को अनटाइड ग्रांट में बदलने की व्यवस्था होनी चाहिए।

मनरेगा : मनरेगा पंचायतों के विकास बजट का बड़ा हिस्सा है। हालांकि यह पैसा सीधे प्रधान को नहीं मिलता, लेकिन ग्राम पंचायत इसकी प्रमुख कार्यान्वयन एजेंसी होती है।

मनरेगा से होने वाले प्रमुख कार्य

  • तालाब और पोखर निर्माण
  • जल संरक्षण
  • कच्ची सड़क
  • नाला निर्माण
  • वृक्षारोपण
  • भूमि विकास

कई बड़ी पंचायतों में मनरेगा के तहत सालाना लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक के काम होते हैं।

स्वच्छ भारत मिशन (SBM)

स्वच्छ भारत मिशन के तहत पंचायतों को स्वच्छता संबंधी कार्यों के लिए धन मिलता है। इस राशि का उपयोग होता है:

  • सार्वजनिक शौचालय
  • सामुदायिक शौचालय
  • कचरा प्रबंधन
  • ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन
  • सफाई व्यवस्था

राज्य वित्त आयोग (SFC) : जैसे केंद्र सरकार वित्त आयोग के जरिए पैसा देती है, वैसे ही राज्य सरकारें भी राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर पंचायतों को अनुदान देती हैं। यह राशि राज्य-दर-राज्य अलग होती है और पंचायतों के बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती है।

पंचायत की अपनी आय : अधिकांश पंचायतों की स्वयं की आय सीमित होती है, लेकिन कुछ स्रोत ऐसे हैं जिनसे पंचायत सीधे राजस्व अर्जित करती है।

  • हाट-बाजार शुल्क
  • दुकान किराया
  • तालाब पट्टा
  • भवन कर
  • जल कर
  • मेले का शुल्क
  • सामुदायिक भवन किराया

एक ग्राम पंचायत का बजट कितना हो सकता है?

इसका कोई राष्ट्रीय औसत उपलब्ध नहीं है क्योंकि हर पंचायत की आबादी, क्षेत्रफल और विकास कार्य अलग होते हैं। फिर भी सामान्य तौर पर पंचायतों का वार्षिक विकास बजट कुछ इस प्रकार देखा जाता है:

पंचायत का आकारअनुमानित वार्षिक बजट
छोटी पंचायत₹10-25 लाख
मध्यम पंचायत₹25-75 लाख
बड़ी पंचायत₹75 लाख-2 करोड़
विशेष परियोजनाओं वाली पंचायत₹2 करोड़ से अधिक

यह आंकड़े केवल अनुमानित हैं और किसी आधिकारिक राष्ट्रीय औसत का प्रतिनिधित्व नहीं करते।

पैसा खर्च कहां होता है?

ग्राम पंचायत का अधिकांश बजट विकास कार्यों पर खर्च होता है।

  • बुनियादी ढांचा
  • सीसी रोड
  • इंटरलॉकिंग सड़क
  • पुलिया
  • नाली
  • पंचायत भवन
  • जल प्रबंधन
  • हैंडपंप
  • पाइप पेयजल योजना
  • पानी की टंकी
  • वर्षा जल संचयन
  • स्वच्छता
  • सार्वजनिक शौचालय
  • कचरा निस्तारण
  • सफाई व्यवस्था
  • सामुदायिक सुविधाएं
  • स्ट्रीट लाइट
  • सामुदायिक भवन
  • खेल मैदान
  • ग्राम सभा स्थल

क्या प्रधान अकेले पैसा खर्च कर सकता है?

नहीं। ग्राम पंचायत की वित्तीय व्यवस्था कई स्तरों की निगरानी में चलती है। जानिए किन लोगों की होती हैं भूमिकाएं

  • ग्राम सभा
  • ग्राम पंचायत
  • प्रधान
  • पंचायत सचिव
  • तकनीकी सहायक
  • ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO)
  • जिला प्रशासन

किसी भी विकास कार्य के लिए प्रस्ताव, स्वीकृति, तकनीकी जांच, माप पुस्तिका (Measurement Book) और भुगतान की प्रक्रिया तय होती है।

सबसे बड़ा भ्रम क्या है?

गांवों में अक्सर यह धारणा होती है कि प्रधान के खाते में सीधे करोड़ों रुपये आते हैं। इसलिए पंचायत का कुल बजट करोड़ों रुपये का दिख सकता है, लेकिन प्रधान उसे अपनी इच्छा से कहीं भी खर्च नहीं कर सकता।

  • अधिकांश पैसा योजना-विशिष्ट होता है।
  • कई योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों या एजेंसियों को जाती है।
  • मनरेगा का बड़ा हिस्सा मजदूरी भुगतान में खर्च होता है।
  • टाइड ग्रांट को केवल निर्धारित मदों में ही खर्च किया जा सकता है।
  • वित्त आयोग का पैसा भी नियमों और ऑडिट के दायरे में रहता है।

एक नजर में समझें ग्राम पंचायत का पूरा मामला

पंचायत का आकारअनुमानित वार्षिक बजट
छोटी पंचायत₹10-25 लाख
मध्यम पंचायत₹25-75 लाख
बड़ी पंचायत₹75 लाख-2 करोड़
विशेष परियोजनाओं वाली पंचायत₹2 करोड़ से अधिक