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छोटे बच्चों को सोते समय आएं खर्राटे तो अलर्ट हो जाएं

बच्चों में सोते समय खर्राटे लेने की समस्या बेहद आम हो गई है।

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खर्राटे

बच्चों में सोते समय खर्राटे लेने की समस्या बेहद आम हो गई है। अक्सर माता-पिता बच्चों को सांस लेने में तकलीफ, मुंह से सांस लेने, सांस फूलने, रात में ठीक से न सो पाने, नींद में चौंककर अचानक उठ जाने और खर्राटे लेने की शिकायत विशेषज्ञ के पास लाते हैं। जानते हैं इसके प्रमुख कारण व इलाज के बारे में-

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क्या हैं कारण - 10 साल से कम उम्र के बच्चों में एडेनॉएड हाइपरट्रॉफी यानी नाक के पीछे मौजूद एडेनॉइड्स के आकार में बढऩे से यह समस्या होती है। यह आकार संरचनात्मक, एलर्जिक या किसी इंफेक्शन के कारण बढ़ सकता है। संरचनात्मक रूप से एडेनॉइड्स जन्म से 8 साल तक की उम्र तक बढ़ते हैं और फिर 14 साल की उम्र तक धीरे-धीरे सामान्य आकार में आ जाते हैं।

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खर्राटे

यदि इस उम्र तक ये सामान्य स्थिति में नहीं आते हैं तो दांतों का एक के ऊपर एक का चढऩा, ठुड्डी छोटी रह जाना, नाक दबी हुई हो सकती है या आंखों के सुस्त होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में सतर्कता बरतनी जरूरी है।

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जांच व इलाज - इस समस्या में नेजल एंडोस्कोपी के अलावा नाक का एक्सरे कर समस्या का पता लगाया जाता है। लक्षण यदि सामान्य हैं तो दवाओं के जरिए इलाज करते हैं। यदि बच्चा ज्यादा परेशान है तो इस स्थिति में एडेनॉइड्स की सर्जरी कराना जरूरी होता है। इस सर्जरी के लिए नाक या गले के जरिए नेजल एंडोस्कोपी को डालकर बढ़े हुए एडेनॉइड्स को काटकर हटा दिया जाता है। इस दौरान रोगी को एक दिन के लिए अस्पताल में भर्ती रखते हैं। डॉ. तरूण ओझा, ईएनटी सर्जन, महात्मा गांधी हॉस्पिटल, जयपुर