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स्ट्रेस बना देता है बच्चों को मैच्योर

बचपन में होने वाले नकारात्मक अनुभवों जैसे बीमारी या माता-पिता के तलाक से होने वाले तनाव के कारण टीनेज में दिमाग के कुछ हिस्सों में तेजी से परिपक्वता आती है।

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Shankar Sharma

Sep 08, 2018

स्ट्रेस बना देता है बच्चों को मैच्योर

बचपन में होने वाले नकारात्मक अनुभवों जैसे बीमारी या माता-पिता के तलाक से होने वाले तनाव के कारण टीनेज में दिमाग के कुछ हिस्सों में तेजी से परिपक्वता आती है। एक नए अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है। इस अध्ययन में पाया गया है कि इन अनुभवों के कारण प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स और एमिगडला में तेजी से परिपक्वता आती है, जो कि किशोरावस्था में भावनाओं को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

स्ट्रेस बना देता है बच्चों को मैच्योर

नीदरलैंड के रेडबांड विश्वविद्यालय की अन्ना टाइबोरोव्सका ने बताया कि यदि आप तनावपूर्ण माहौल में बड़े होते हैं, तो क्रमविकास संबंधी परिप्रेक्ष्य से तेजी से परिपक्व होना उपयोगी होता है। हालांकि, यह दिमाग को सुविधाजनक तरीके से वर्तमान वातावरण में समायोजित होने से रोकता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि इसके विपरीत, अगर जीवन में बाद के वर्षों जैसे स्कूल में साथियों के कारण पैदा होने वाले तनाव के कारण दिमाग के हिप्पोकैंपस और प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स क्षेत्र किशोरावस्था में धीमी गति से परिपक्व होता है।

स्ट्रेस बना देता है बच्चों को मैच्योर

टाइबोरोव्सका ने कहा कि दिमाग पर तनाव का मजबूत प्रभाव यह होता है कि इससे असामाजिक व्यक्तित्व के लक्षण विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। बता दें कि यह अध्ययन साइंटिफिक रिपोट्र्स नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

स्ट्रेस बना देता है बच्चों को मैच्योर

शोधकर्ताओं को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि जीवन में बाद में सामाजिक तनाव किशोरावस्था के दौरान धीमी परि पक्वता का कारण बनता है। टाइबोरोव्सका ने कहा, दुर्भाग्यवश, इस अध्ययन में हम निश्चित रूप से यह नहीं कह सकते कि तनाव इन प्रभावों का कारण होता है। हालांकि, जानवरों पर किए गए अध्ययन से हम अनु मान लगा सकते हैं कि यह वास्त व में तनाव का कारण है।