
durgiana temple amritsar
लक्ष्मी नारायण मंदिर, दुर्गा तीर्थ और सीता मंदिर के अन्य नामों से भी मशहूर अमृतसर का 'दुर्ग्याणा' मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित मंदिर है। कहा जाता है कि इस हिंदू मंदिर का इतिहास 16वीं सदी पुराना है जबकि गुरु हरसाईमल कपूर के प्रयासों से धन एकत्रित करने के बाद मंदिर के पुनर्निर्माण की शुरुआत हुई और स्थापत्य के लिहाज से सिखों के स्वर्ण मंदिर से प्रेरणा ली गई।
गंगा दशमी के दिन 1925 में दुर्ग्याणा मंदिर की नींव पं. मदनमोहन मालवीय के हाथों से रखी गई थी। चांदी के कपाटों के चलते इसे 'सिल्वर टेम्पल' भी कहते हैं। मंदिर में प्रवेश करते ही अखंड ज्योति के दर्शन होते हैं। यहां देवी दुर्गा के एक रूप शीतला माता की भी आराधना होती है।
दुर्ग्याणा मंदिर परिसर में सीता और हनुमान के मंदिर भी हैं। लक्ष्मी नारायण मंदिर, सरोवर के बीच है, जिसकी छतरियां और गुंबद 'स्वर्ण मंदिर' जैसे हैं। संगमरमर से बने मंदिर तक पहुंच के लिए एक पुल बनाया गया है। मंदिर में कांगड़ा शैली की चित्रकला और शीशे का अद्भुत कार्य मंत्रमुग्ध कर देने वाला है।

Published on:
24 Dec 2015 03:31 pm
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