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‘कर्फ्यू वाली माता का मंदिर’ को आप कितना जानते हैं?

'कर्फ्यू वाली माता का मंदिर' को आप कितना जानते हैं?

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भोपाल

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Pawan Tiwari

May 02, 2019

curfew wali mata mandir

'कर्फ्यू वाली माता का मंदिर' को आप कितना जानते हैं?

यूं तो माता के कई नाम हैं, लेकिन भोपाल शहर का एक मंदिर 'कर्फ्यू वाली माता का मंदिर' के नाम से भी प्रसिद्ध है। भवानी चौक सोमवारा स्थित 'कर्फ्यू वाली माता मंदिर' अब शहर की पहचान बन गईं हैं। इसके नाम के पीछे भी बड़ा रोचक मामला है।

पीरगेट स्थित यह मंदिर आस्था का केंद्र है। नवरात्र में यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं, साथ ही सालभर यहां दर्शनार्थियों की भीड़ लगी रहती है। मातारानी के इस दरबार में मन्नत के लिए लोग नारियल में अर्जी लिखकर लगाते हैं। इससे श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है। दर्शन के लिए यहां न सिर्फ भोपाल, बल्कि आसपास से भी लोग पहुंचते हैं।

...और बन गईं 'कर्फ्यू वाली माता'

कहा जाता है कि अश्विन नवरात्र में यहां झांकी बैठती थी, झांकी के सामने मातारानी की प्रतिमा स्थापना को लेकर 1982 में विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि यहां प्रशासन को कर्फ्यू लगाना पड़ा। एक महीने तक यहां कर्फ्यू लगा रहा, उसके बाद यहां प्रतिमा की स्थापना हुई और मंदिर का निर्माण हुआ, तब से इस मंदिर को कर्फ्यू वाली माता के नाम से जाना जाता है।

सोने का वर्क, चांदी का सिंहासन

मंदिर की साज-सज्जा में कई धातुओं का इस्तेमाल किया गया है। बताया जाता है कि मंदिर में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के सानिध्य में श्रीयंत्र की स्थापना की गई है, जो चांदी का है, उस पर सोने का वर्क है। यहां स्वर्ण कलश भी है। 130 किलो चांदी का आकर्षक गेट, 18 किलो चांदी की छोटी प्रतिमा, 21 किलो चांदी का सिंहासन है। आधा किलो सोने का वर्क दरवाजों और दीवारों पर किया गया है।

चर्चा में एक बार फिर

भाजपा की ओर से भोपाल लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनीं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को इस मंदिर में जाने से यह मंदिर एक बार फिर चर्चा में हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर की पहचान तो 1982 में ही मिल गई थी, जब यहां आने वाले लोग 'कर्फ्यू वाली माता मंदिर' के नाम से पुकारने लगे, लेकिन साध्वी प्रज्ञा के विवादित बयान पर चुनाव आयोग के 72 घंटे के बैन के बाद, पहले दिन ही इस मंदिर में साध्वी का जाना चर्चा का केन्द्र बन गया और लोग इसे सियासी चश्मे से देखने लगे हैं।


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