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माता सीता ने यहां पर दी थी अग्नि परीक्षा, गर्म जल लोगों के लिए अबूझ पहेली

माता सीता ने यहां पर दी थी अग्नि परीक्षा, गर्म जल लोगों के लिए अबूझ पहेली

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भोपाल

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Pawan Tiwari

May 12, 2019

Sita kund

माता सीता ने यहां पर दी थी अग्निपरीक्ष, गर्म जल लोगों के लिए अबूझ पहेली

रामचरितमानस के अनुसार, माता सीता ने अपनी पवित्रता प्रमाणित करने के लिए अग्नि परीक्षा दी थी। लेकिन क्या आप जानते हैं माता सीता ने कहां पर अग्नि परीक्षा दी थी। अगर नहीं, तो हम आपको बताएंगे कि मां सीता ने कहां पर अग्नि परीक्षा दी थी और वहां के कुंड का गर्म जल अब तक अबूझ पहेली क्यों है?

कथा के अनुसार, माना जाता है कि माता सीता ने बिहार राज्य के मुंगेर जिला मुख्यालय से लगभग 8 किमी पूर्व स्थित सीताकुंड मंदिर परिसर में ही अग्नि परीक्षा दी थी और अपनी पवित्रता सिद्ध की थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अग्नि परीक्षा स्थल पर ही सीताकुंड की उत्पती हुई थी, जहां से आज भी गर्म जल प्रवाहित हो रहा है।

गर्म जल लोगों के लिए अबूझ पहेली

विश्व विख्यात सीताकुंड से निकलने वाला गर्म जल आज भी अबूझ पहेली है। क्योंकि यहां पर सीताकुंड के अलावा आस-पास में ही राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के नाम पर भी चार कुंड है। सीताकुंड का पानी हमेशा गर्म रहता है। जबकि अन्य चारों कुंड का पानी ठंडा रहता है। यह माता सीता की शक्ति का प्रभाव है या कुछ और, लोगों के लिए आज भी यह रहस्य का विषय बना हुआ है।

रामतीर्थ के नाम से भी जानते हैं सीताकुंड

सीताकुंड को लोग रामतीर्थ के नाम से भी जानते हैं। इसका उल्लेख आनंद रामायण में भी है। यही नहीं, मुंगेर गजेटियर में भी इसकी चर्चा सीता के अग्नि परीक्षा स्थल के तौर पर की गयी है। हालांकि कई इतिहासकार इसे एक कल्पित कथा मानते हैं।

समय-समय पर वैज्ञानिकों ने की शोध

सीताकुंड के जल की जांच समय-समय पर वैज्ञानिकों ने भी लेकिन आज तक पता नहीं चल सका कि सीताकुंड का जल इतना गर्म क्यों रहता है। बताया जाता है कि इस कुंड की लंबाई और चौड़ाई 20 फीट है जबकि कुंड 12 फीट गहरा है। अंग्रेज पर्यटक टाइफेन्थलर ने 1765 सीताकुंड के जल का परीक्षण कर कहा था कि यहां का जल आठ महीने तक शुद्ध रहता है। उन्होंने बताया था ग्रीष्म ऋतु में यहां के जल का तापमान कम हो जाता है।

माघ में लगता है एक माह का मेला

ऐसे तो यहां पर सालों भर पर्यटक आते रहते हैं लेकिन जाड़े के मौसम सबसे अधिक पर्यटक यहां आते हैं। बताया जाता है कि माघ महीने में यहां एक माह का मेला लगता है। माघ पूर्णिमा का मेले से सीताकुंड का क्या संबंध है, इसका प्रमाण अब तक नहीं मिल पाया है।


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