
योग: वज्र नामक नैसर्गिक अशुभ योग संपूर्ण दिवारात्रि है। वज्र नामक योग की प्रथम तीन घटी शुभ कार्यों में वर्जित है। विशिष्ट योग: रात्रि ९.४३ से दोष समूह नाशक रवियोग नामक शक्तिशाली शुभ योग है। करण: बव नामकरण पूर्वाह्न ११.२४ तक, इसके बाद बालव नामकरण है।

श्रेष्ठ चौघडि़ए: आज प्रात: ८.३४ से ९.५१ तक शुभ तथा दोपहर १२.२६ से सायं ४.१८ तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं एवं दोपहर १२.०५ से दोपहर १२.४६ तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं।

राहुकाल: प्रात: ९.०० से १०.३० बजे तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासंभव वर्जित रखना हितकर है।