राधावल्लभ मंदिर में विराजमान इस अनूठे विग्रह में आधे में कृष्ण और आधे में राधाजी है। यहां पर कई सदियों से एक कहावत है 'राधा वल्लभ दर्शन दुर्लभ'। यहां हर किसी को दर्शन नहीं होते। केवल वही व्यक्ति इस मंदिर में दर्शन कर पाते हैं जिनके ह्रदय में प्रेम है, भावुकता है और भक्ति हैं। इसी लिए यहां आने वाले भक्तजन उन्हें रिझाने के लिए भजन-कीर्तन करते हैं। उन्हें पंखा झलते हैं और यथासंभव उनकी सेवा-पूजा कर उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। कहा जाता है जिस पर भी भगवान राधावल्लभ प्रसन्न हो जाएं उनकी सभी मनोकामनाएं तुरंत पूर्ण होती हैं।