बिहारः गांधी मैदान में गोडसे का जिक्र, संविधान बचाओ-नागरिकता बचाओ महारैली में केंद्र सरकार पर निशाना

  • पटना में आयोजित रैली में भारी तादाद में लिया लोगों ने हिस्सा।
  • कन्हैया कुमार, मेधा पाटकर, तुषार गांधी ने भी किया संबोधित।
  • CAA, NRC, NPR और दिल्ली हिंसा का जमकर किया विरोध।

पटना। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश में विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को पटना के गांधी मैदान पर तमाम संगठनों द्वारा 'संविधान बचाओ-नागरिकता बचाओ' नामक महारैली का आयोजन किया गया। इस दौरान केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा गया। रैली में काफी तादाद में भीड़ पहुंची और नागरिकता को लेकर तमाम नेताओं ने भाषण दिए।

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समूचे बिहार में CAA, NRC, NPR के खिलाफ जन-गण-मन यात्रा करने के बाद कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) नेता कन्हैया कुमार ने गुरुवार को इस महारैली में इस यात्रा का समापन किया। इस दौरान कन्हैया कुमार ने कहा कि जिन्हें आजादी से नफरत है, वो हमारे खिलाफ हैं। यह किसी एक आदमी की रैली नहीं है। कई लोग बोलते हैं कि इस रैली की वजह बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव हैं, लेकिन चुनाव तो तब होगा जब देश बचेगा।

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कन्हैया ने आगे कहा कि वह किसी भी व्यक्ति को नागरिकता दिए जाने का विरोध नहीं कर रहे हैं। उनका विरोध नागरिकता के नाम पर किए जा रहे नफरत के व्यवसाय से है। उन्होंने गांधी-गोडसे का जिक्र करते हुए कहा कि शांति के पुजारी गांधी की जिंदाबाद करने वाले जेल में डाल दिए गए हैं जबकि गोडसे जिंदाबाद का नारा लगाने वाले संसद में बैठा दिए गए हैं।

कन्हैया कुमार ने मुसलमानों को लेकर कहा कि हमारे देश के मुसलमानों ने महात्मा गांधी को चुना था, ना कि मोहम्मद अली जिन्ना को। दिल्ली हिंसा पर कन्हैया ने कहा कि देश की जनता गोडसे को सरकार बना बैठी है इसलिए ऐसा हो रहा है। अगर गांधी होते तो उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा में नहीं जल रही होती। जनता को यह तय करना है कि वह गांधी को चुनना चाहती है या गोडसे को।

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वहीं, महारैली में महात्मा गांजी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने भाजपा सरकार को दोगला बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार दोगुली जुबान में बात कर रही है। पहले बापू को गोलियां मारी गईं और अब सरकार हमारे देश को गोलियां मार रही है। इसका विरोध होना चाहिए क्योंकि देश को बांटने वाली शक्तियों को कैसे आगे बढ़ने दिया जा सकता है। ये वो लोग हैं जो देश के जेहन में जहर घोल रहे हैं, गोली मारने के नारे लगवा रहे हैं।

इस रैली में शामिल मशहूर समाजसेवी मेधा पाटकर ने कहा कि दिल्ली की गद्दी को धक्का देना, गांधी मैदान से ही संभव नजर आता है। भरोसा है कि बिहार से एक बार फिर आंदोलन उठेगा। शाहीन बाग और जाफराबाद में सरकार द्वारा फैलाई जा रही हिंसा को देखने के बाद आपका लिया गया संकल्प सत्ता हिला देगा। जरूरत है कि जाति और धर्म की राजनीति और वोटबैंक से आगे बढ़ें।

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इसके अलावा पूर्व नौकरशाह आईएएस कन्नन गोपीनाथन ने लोगों से सरकार के अत्याचार और हिंसा के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया। गोपीनाथन बोले कि एक वक्त था जब नागरिक सरकार को चुनते थे, जबकि अब सरकार कवायद कर रही है कि वो नागरिक चुने। नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर देश के हर नागरिक के खिलाफ बनाया गया है। यह सिर्फ हिंदू या मुसलमान के खिलाफ नहीं है। सरकार कैसे काम करती है अच्छी तरह वाकिफ हैं।

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अमित कुमार बाजपेयी
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