scriptचुनाव से पहले निर्वाचन आयोग की तैयारी, मतदान के 48 घंटे पहले सोशल मीडिया पर भी बंद हो प्रचार | Ensuring 48 hour pre-poll silence on social media necessary | Patrika News
राजनीति

चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग की तैयारी, मतदान के 48 घंटे पहले सोशल मीडिया पर भी बंद हो प्रचार

चुनाव आयोग द्वारा गठित पैनल की सिफारिश है कि चुनाव से पहले इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स और सोशल मीडिया कंपनियों को सजग रहने की जरूरत है।

Social Media

लोकसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग की समिति की सिफारिश, मतदान के 48 घंटे पहले सोशल मीडिया पर भी बंद हो प्रचार

नई दिल्ली। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की समीक्षा के लिए निर्वाचन आयोग ने एक पैनल का गठन किया था। इस पैनल की सिफारिश है कि चुनाव से पहले इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स और सोशल मीडिया कंपनियों को सजग रहने की जरूरत है।
इसमें कहा गया है कि मतदान से 48 घंटे पहले चुनाव अभियान बंद करने के नियम का पालन करते हुए संबंधित सामग्री तुरंत हटा दी जाए। यह कार्रवाई आयोग द्वारा दिए गए ऐसे निर्देशों के 3 घंटे के भीतर की जानी चाहिए।
2019 आम चुनाव में होगा तीन गुना वीवीपैट का इस्तेमाल! सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से मांगा

इस पैनल की अध्यक्षता वरिष्ठ निर्वाचन उपायुक्त उमेश सिन्हा ने की। उन्होंने बृहस्पतिवार को चुनाव आयोग को रिपोर्ट सौंपी। इसमें सिन्हा ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126(1) में संशोधन किए जाने की सलाह दी गई है।
कहा गया है कि इसके अंतर्गत प्रिंट इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और बीच की संस्थाओं (इंटरमीडिएरीज) पर भी प्रचार के दौरान खामोशी बनाए रखने के वक्त यानी ‘कैंपेन साइलेंस पीरियड’ को लागू किया जाना चाहिए।

स्टार प्रचारकों को साइलेंस पीरियड में संवाददाता सम्मेलन, साक्षात्कार से रोका जाए…
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 2(w) के तहत इंटरमीडिएरीज की परिभाषा में टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स, वेब-होस्टिंग सर्विस प्रोवाइडर्स, सर्च इंजन्स आदि शामिल हैं।
इस प्रस्तावित संशोधन के लिए समिति का कहना है, “यह सुनिश्चित करेंगे कि नए दौर के मीडिया के जरिये होने वाले आक्रामक प्रचार के वक्त में मतदाता किसी अनचाहे प्रभाव से सुरक्षित रहें और अपनी राजनीतिक रुचियों को चुनने के लिए 48 घंटे का वक्त पाएं।”
एक साथ हो सकते हैं लोकसभा और जम्मू एवं कश्मीर चुनाव! राजनाथ बोले- सरकार को कोई आपत्ति नहीं

यहां यह जानना जरूरी है कि मौजूदा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम केवल सिनेमैटोग्राफ, टेलीविजन या ऐसे ही माध्यमों के जरिये चुनावी सामग्री को लोगों को दिखाने पर पाबंदी लगाता है।
इस पैनल ने आचार संहिता में भी बदलाव की सिफारिश की ताकि चुनावी दल कम से कम मतदान के 72 घंटे पहले (या कई चरणों में होने वाले चुनाव में पहले चरण की शुरुआत से 72 घंटे पहले) अपना घोषणा पत्र जारी कर दें।
एक नोटिफिकेशन तंत्र, लोक प्रतिनिधित्व की धारा 126 के उल्लंघन के मामलों की सूचना देगा…
इसके अलावा समिति ने यह भी सिराफिश की कि राजनीतिक दलों के स्टार प्रचारकों को साइलेंस पीरियड के दौरान चुनावी मामलों से जुड़े किसी भी संवाददाता सम्मेलन, साक्षात्कार से रोका जाए।
पैनल द्वारा सौंपी गई इस रिपोर्ट पर संभवता मंगलवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में होने वाली आयोग की बैठक के दौरान बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

सोशल मीडिया कंपनियों समेत इंटरमीडिएरीज के लिए समिति ने सुझाव दिया है कि इन्हें अपने मंच पर उन प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए ताकि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने में इनका दुरुपयोग न किया जा सके।
तमिलनाडु: गाजा तूफान के कारण निर्वाचन आयोग ने रद्द की तिरुवरूर उपचुनाव की अधिसूचना

इसके अंतर्गत एक नोटिफिकेशन तंत्र शामिल होगा जिसके जरिये आयोग लोक प्रतिनिधित्व की धारा 126 के उल्लंघन के मामलों के बारे में इन प्लेटफॉर्म को सूचित करेगा।
वहीं, आयोग एक अधिकारी भी नियुक्त करेगा जो इंटरमीडिएरीज के संपर्क में रहेगा और यह मंच-माध्यम आयोग के लिए एक विशेष शिकायत निवारण प्रकोष्ठ भी खोलेंगे। चुनाव के दौरान इनके पास आयोग के आदेश का तुरंत पालन करने के लिए एक विशेष टीम भी होगी जो नियमों का उल्लंघन करने वाली सामग्री को हटाने या निष्क्रिय करने का काम करेगी।

Hindi News/ Political / चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग की तैयारी, मतदान के 48 घंटे पहले सोशल मीडिया पर भी बंद हो प्रचार

loksabha entry point

ट्रेंडिंग वीडियो