हिंदी दिवस पर अमित शाह ने जताई एक देश-एक भाषा की इच्छा, ओवैसी बोले- सबसे बड़ा राष्ट्र

हिंदी दिवस पर अमित शाह ने जताई एक देश-एक भाषा की इच्छा, ओवैसी बोले- सबसे बड़ा राष्ट्र
अमित शाह और ओवैसी

Amit Kumar Bajpai | Updated: 14 Sep 2019, 07:07:20 PM (IST) राजनीति

  • हिंदी दिवस के अवसर पर गृह मंत्री ने ट्वीट कर दी बधाई
  • ओवैसी ने संविधान का हवाला देते हुए जताया विरोध
  • गृह मंत्रालय संभालने के बाद 60 फीसदी फाइलों में हिंदी टिप्पणी

नई दिल्ली। हिंदी दिवस के अवसर पर शनिवार को गृह मंत्री अमित शाह ने इच्छा जताई कि हिंदी को देश की आम भाषा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा देश में सबसे ज्यादा हिंदी बोली जाती है और यह समूचे देश को एकजुट कर सकती है। सीधे शब्दों में कहें तो शाह ने एक देश-एक भाषा की बात कही। वहीं, शाह की इस अपील का विरोध करते हुए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि भारत हिंदी, हिंदू और हिंदुत्व से कहीं बड़ा है।

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दरअसल, शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, "भारत विभिन्न भाषाओं का देश है और हर भाषा का अपना महत्व है परन्तु पूरे देश की एक भाषा होना अत्यंत आवश्यक है जो विश्व में भारत की पहचान बने। आज देश को एकता की डोर में बाँधने का काम अगर कोई एक भाषा कर सकती है तो वो सर्वाधिक बोले जाने वाली हिंदी भाषा ही है।"

उन्होंने आगे लिखा, "आज हिंदी दिवस के अवसर पर मैं देश के सभी नागरिकों से अपील करता हूँ कि हम अपनी-अपनी मातृभाषा के प्रयोग को बढाएं और साथ में हिंदी भाषा का भी प्रयोग कर देश की एक भाषा के पूज्य बापू और लौह पुरुष सरदार पटेल के स्वप्न को साकार करने में योगदान दें। हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं"

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इसके बाद हिंदी दिवस पर आयोजित एक समारोह में अमित शाह ने कहा कि हिंदी को देश के हर घर और हर व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा, "अगले वर्ष हम देश के विभिन्न हिस्सों में हिंदी दिवस समारोहों का आयोजन करेंगे। मैं हर माता-पिता से अपील करता हूं कि वे अपने बच्चों से और अपने सहयोगियों से अपनी भाषा में बात करें।"

इस दौरान उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में अगला लोकसभा चुनाव होगा और तब तक हिंदी को एक स्मारक जैसा दर्ज मिल गया होगा। समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया ने एक बार कहा था कि लोकतंत्र में सरकार की भाषा वही होनी चाहिए, जिसे लोग समझें।

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इतना ही नहीं, शाह ने बताया, "जब मैंने पहली बार गृह मंत्रालय का जिम्मा संभाला, पहले 10 दिनों में मेरे पास एक भी फाइल हिंदी में नहीं आई। अब मेरे पास आने वाली 60 फीसदी फाइलों में हिंदी टिप्पणी होती है। एक भाषा तभी विकसित हो सकती है जब नई पीढ़ी उसे बोलने में फक्र महसूस करे। हमारे देश में मौजूद तमाम भाषाएं-बोलियां हमारी ताकत हैं। हमें देखना होगा कि कोई भी विदेशी भाषा हमारी मूल भाषा से आगे न निकल सके।"

वहीं, ऑल इंजिया मजलिस-ए-इत्तेहास उल मुसलमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने गृह मंत्री के हिंदी प्रेम की खिलाफत की। ओवेसी ने कहा कि हिंदी समस्त भारतीयों की मातृ भाषा नहीं है। उन्होंने शाह से सवाल किया कि क्या आप तमाम मातृ भाषाओं की अनेकता और सुंदरता की तारीफ कर सकते हैं।

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ओवैसी यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि अनुच्छेद 29 हर भारतीय को भाषा, लिपि और संस्कृति का अधिकार देता है। भारत हिंदी, हिंदू और हिंदुत्व से कही बड़ा है।

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