
नई दिल्ली। गुजरात कैडर के राकेश अस्थाना एक ऐसे आईपीएस अधिकारी हैं जो समय-समय पर सुर्खियों में छाए रहते हैं। इस बार वो दिल्ली पुलिस कमिश्नर के रूप में नियुक्ति मिलने पर चर्चा में हैं। साथ ही उनकी नियुक्ति एक बार विवादों में है। इस बार केवल विवादों की चर्चा ही नहीं, बल्कि दिल्ली विधानसभा ने उनकी नियुक्ति के खिलाफ एक प्रस्ताव भी पारित कर दिया है। आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा ने दिल्ली विधानसभा में पारित प्रस्ताव पर बहस के दौरान कहा कि राकेश अस्थाना की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना है। इस घटना के बाद से उनकी नियुक्ति को लेकर सियासत और ज्यादा गर्मा गई है। अब सवाल यह है कि आईपीएस अस्थाना की नियुक्ति सर्वोच्च अदालत की अवमानना कैसे?
आप विधायक ने बताया - ये है अवमानना का आधार
आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा ने विधानसभा में राकेश अस्थाना की नियुक्ति के खिलाफ रखे गए प्रस्ताव पर कहा है कि यह नियुक्ति न केवल असंवैधानिक है बल्कि उच्चतम न्यायालय की अवमानना भी है। उन्होंने चर्चा के दौरान सदन को बताया कि 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट में कहा गया था कि अगर डीजीपी के लेवल पर किसी की नियुक्ति होनी है तो उनके रिटायरमेंट में कम से कम 6 महीने का समय होना चाहिए। इस प्रक्रिया में यूपीएससी से सलाह लेने का भी आदेश दिया गया था। इसकी पूरी प्रक्रिया के पालन का आदेश दिया गया था। अफसोस की बात यह है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय इस प्रक्रिया के एक भी मानक का पालन राकेश अस्थाना की नियुक्ति में नहीं किया।
गृह मंत्रालय ले अस्थाना की नियुक्ति वापस
दिल्ली विधानसभा में प्रस्ताव पास होने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी मीडिया को इस बारे में ब्रीफ करते हुए कहा कि राकेश अस्थाना की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना है। उन्होंने अस्थाना की नियुक्ति को रद्द करने की मांग की है। इससे पहले दिल्ली विधानसभा ( Delhi Assembly) में गुरुवार को राकेश अस्थाना की पुलिस आयुक्त की नियुक्ति को लेकर चर्चा हुई और एक प्रस्ताव पारित कर गृह मंत्रालय से नियुक्ति वापस लेने को कहा गया है।
रिटायरमेंट से 3 दिन पहले मिला एक्सटेंशन
1984 बैच के गुजरात कैडर के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी राकेश अस्थाना ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर का पदभार संभाल लिया है। माना जा रहा है कि कई काबिल आईपीएस अधिकारियों को दरकिनार कर अस्थाना को रिटायर्ड होने के ठीक 3 दिन पहले एक साल का एक्सटेंशन देकर दिल्ली पुलिस कमिश्नर बना दिया गया। अस्थाना दिल्ली पुलिस के 23वें कमिश्नर हैं। आईपीएस राकेश अस्थाना 31 जुलाई, 2021 को बीएसएफ डीजी के पद से रिटायर हो रहे थे, लेकिन मंगलवार को उन्हें अचानक न सिर्फ एक साल का एक्सटेंशन दे दिया गया बल्कि गुजरात कैडर से एजीएमयूटी कैडर में डेपुटेशन में भेज दिया गया और दिल्ली पुलिस कमिश्नर बना दिया गया।
बाहर के कैडर से CP बनने वाले तीसरे कमिश्नर
27 दिन पहले एक्टिंग सीपी लगे 1988 बैच के आईपीएस अफसर बालाजी श्रीवास्तव को पद से हटा दिया गया। इसके अलावा दिल्ली पुलिस कमिश्नर की दौड़ में आगे चल रहे 1987 बैच के आईपीएस अफसर सत्येंद्र गर्ग और ताज हसन को दरकिनार कर दिया गया। एसएस जोग और अजयराज शर्मा के बाद राकेश अस्थाना बाहर के कैडर से आने वाले दिल्ली पुलिस के तीसरे कमिश्नर हैं।
हमेशा विवादों में रहे हैं अस्थाना
बतौर पुलिस अधिकारी देशभर में राकेश अस्थाना का नाम विवादों में उस समय आया जब वो सीबीआई में स्पेशल डायटेक्टर थे। उनका सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा से विवाद हुआ और मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से रिश्वत लेने के आरोप में अस्थाना पर केस दर्ज हुआ था। स्टर्लिंग बॉयोटेक मामले में भी अस्थाना पर रिश्वत लेने के आरोप लगे जिसके बाद आलोक वर्मा और अस्थाना दोनों को सीबीआई से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। अस्थाना को बाद में सभी आरोपों से क्लीन चिट मिल गई और उन्हें अकेले डीजी सिविल एविएशन, डीजी बीएसएफ और डायरेक्टर एनसीबी का एक साथ चार्ज दे दिया गया।
पीएम के करीबी अधिकारियों में शुमार
राकेश अस्थाना पीएम नरेंद्र मोदी के करीबी पुलिस अधिकारियों में से एक हैं। जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब अस्थाना सूरत और बड़ोदरा के कमिश्नर रहे। गोधरा कांड की जांच, सीबीआई में रहते चारा घोटाले की जांच, एनसीबी में रहकर सुशांत सिंह ड्रग्स मामले की जांच में अस्थाना की अहम भूमिका रही है।
Updated on:
29 Jul 2021 07:46 pm
Published on:
29 Jul 2021 07:36 pm
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