
मंत्री को चुनाव जितवाया हूं, AIIMS व BSP में नौकरी लगवा दूंगा
रायपुर। सरकारी नौकरी के लालच के चलते लोग आसानी से धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। ठग आसानी से लोगों को झांसा दे रहे हैं। इसी तरह के एक मामले में अज्ञात व्यक्ति ने अपर कलेक्टर निर्मल तिग्गा के नाम से जशपुर इलाके के एक सरपंच से 23 लाख से अधिक ठग लिए। आरोपी ने अपर कलेक्टर के नाम से सरपंच को फोन किया और प्रदेश भर में सरकारी नौकरी लगाने की जानकारी देते हुए भृत्य, चालक, कंप्यूटर ऑपरेटर व अन्य पदों में भर्ती करने का झांसा दिया। इसके बाद सरपंच ने अपने डेढ़ दर्जन रिश्तेदारों और करीबी मित्रों को नौकरी में लगवाने की तैयारी कर ली और उसके एवज में २३ लाख से अधिक दे दिया। पैसा मिलने के बाद आरोपी चंपत हो गया। पीडि़त ने इसकी शिकायत मोवा थाने में की है।
पुलिस के मुताबिक जशपुर के फरसाबहार इलाके के ग्राम सिकिरमा के सरपंच सर्वेश्वर साय पैकरा को अप्रैल 2020 में अज्ञात व्यक्ति ने फोन किया और खुद को अपर कलेक्टर निर्मल तिग्गा बताया। इससे सर्वेश्वर हड़बड़ा गया। प्रारंभ में कथित अपर कलेक्टर ने कोरोना के मामलों को लेकर सर्वेश्वर से पूछताछ की। सामान्य बातचीत के बाद उसने बताया कि प्रदेश भर में सरकारी नौकरी के 1380 पद स्वीकृत किया गया है। इसमें अंबिकापुर, बलरामपुर, सरगुजा और जशपुर में डाटा एंट्री ऑपरेटर, क्लर्क, भृत्य एवं वाहन चालक के पदों पर सीधी भर्ती किया जाना है। किसी को भर्ती करवाना हो, तो बता देना। इसके लिए पैसे देने होंगे। अपर कलेक्टर होने की बात सुनकर सर्वेश्वर को भरोसा हो गया और उन्होंने अपनी पत्नी प्रमिला पैकरा, दीदी सुधावती पैकरा, शोभावती पैकरा, मंजू पैकरा, यशपति पैकरा, रंजीत साय, गुलेश्वर साय, नरेंद्र साय पैकरा, लक्ष्मण साय, चंद्रिका पैकरा, दिनेश कुमार यादव और गुलापी बाई को भृत्य के पद पर और क्लर्क के लिए दुलासी पैकरा, प्रकाश साय, डाटा एंट्री ऑपरेटर के लिए संदीप कुमार पैकरा, वाहन चालक के लिए देवव्रत राम, लक्ष्मण साय के लिए कुल 25 लाख रुपए देने पर सहमती। इसके बाद कथित कलेक्टर ने पैसों को रायपुर में देने कहा।
कार भेजकर रायपुर बुलाया
कथित कलेक्टर ने सरपंच सर्वेश्वर को पूरी तरह अपने झांसे में ले लिया था। और फोन में ही दोनों की पूरी बातचीत हुई थी। कथित कलेक्टर ने पूरी राशि रायपुर देने के लिए कहा। और इसके लिए बकायदा किराए का वाहन सीजी 14 एमएम 5574 सर्वेश्वर के गांव भेजा गया। उस वाहन में बैठकर सर्वेश्वर 13 जून को रायपुर पहुंचा। कथित कलेक्टर ने उसे मोवा के एफसीआई गोदाम वाले मार्ग पर बुलाया और कहा कि वह अपने भतीजे को भेज रहा है। जितना नगद हो दे देना, बाकी के लिए एटीएम कार्ड दे देना। सर्वेश्वर मौके पर पहुंचा, तो एक व्यक्ति आया। इसके बाद सरपंच ने उसे 9 लाख 20 हजार रुपए नगद दिया। साथ में अपनी चचेरी बहन सुधावती पैकरा और सुनीता पैकरा का एसबीआई का एटीएम कार्ड दिया। साथ में उसका पासवर्ड भी दिया। इसके बाद कथित कलेक्टर से बात करने के बाद सर्वेश्वर वापस अपने गांव आ गया।
इसके बाद कथित कलेक्टर पीड़ित सरपंच से बीच-बीच में बात करते रहता था और नियुक्ति के लिए लिस्ट बनने की जानकारी देता था। इससे सरपंच सर्वेश्वर को उस पर भरोसा हो जाता था। 10 जुलाई तक नियुक्ति आदेश भिजवा देंगे। इस बीच सर्वेश्वर के दिए दोनों एटीएम से 5 लाख 14 हजार 207 रुपए का आहरण कर लिया गया। इस बीच कथित कलेक्टर ने उसे 7 जुलाई को फिर फोन किया और नियुक्ति सूची बन जाने की जानकारी दी। साथ ही बताया कि रायपुर आकर बाकी के पैसे देकर नियुक्ति पत्र ले जाओ। इसके अगले दिन सर्वेश्वर 9 लाख 31 हजार रुपए लेकर फिर मोवा पहुंचा और उसी एफसीआई गोदाम वाली रोड पर पहुंचा। कथित कलेक्टर का भतीजा फिर पहुंचा और सर्वेश्वर से पैसे लेकर चला गया। इस दौरान सर्वेश्वर ने कथित कलेक्टर को फोन करके मंत्रालय जाकर नियुक्ति आदेश लेने के लिए बुलाया। तो उसने बहानेबाजी कर दी और नहीं आया। सर्वेश्वर को दूसरे दिन बुलाया। सर्वेश्वर दूसरे दिन रायपुर पहुंचा, और तो कथित कलेक्टर का मोबाइल बंद मिला। सरपंच को ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पुलिस को लिखित शिकायत मिली है। मामले की जांच की जा रही है। पीडि़त का बयान लिया गया है।
-गौतम गावड़े, टीआई, मोवा, रायपुर
Updated on:
06 Sept 2020 05:34 pm
Published on:
06 Sept 2020 04:53 pm

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