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खतरे में बच्चों का भविष्य : 326 बाल श्रमिक स्कूल बंद, 1400 शिक्षक पांच साल से बेरोजगार

खतरे में बच्चों का भविष्य: आरटीई के तहत स्कूलों में दाखिला तो कराया, पर कितने स्कूल जा रहे इसकी नहीं ली जानकारी

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Labor child school

खतरे में बच्चों का भविष्य : 326 बाल श्रमिक स्कूल बंद, 1400 शिक्षक पांच साल से बेरोजगार

रायपुर. वर्षों से चल रहे 326 बाल श्रमिक स्कूलों को 2014 में बंद कर दिया गया था। इससे मानदेय पर काम करने वाले 1400 शिक्षकों की नौकरी भी चली गई। इसके बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह को पत्र लिखकर सभी कर्मचारियों के संविलियन की मांग की थी।

ये शिक्षक पांच साल से आर्थिक संकट झेल रहे हैं। इनमें ऐसे कर्मचारी भी शामिल हैं, जिन्होंने 40 वर्ष तक स्कूलों में सेवा दी है। 30 मई 2014 को राज्य सरकार का पत्र मिलने के बाद प्रदेशभर में गरीब बच्चों के लिए संचालित 326 बाल श्रमिक स्कूलों को बंद कर दिया गया था।

जिले में श्रम विभाग के अधीनस्थ स्कूलों के संचालन के लिए सरकार ने सेटअप भी तैयार किया था। इनमें अधिकतर मानदेय पर काम करने वाले कर्मचारी थे। प्रदेश के 27 जिलों के 326 स्कूलों में 1400 कर्मचारी बच्चों को पढ़ाने के अलावा उनके रहन-सहन, खान-पान की मॉनिटरिंग कर रहे थे। आरटीई के तहत उनका स्कूलों में दाखिला तो करा दिया गया, लेकिन उनमें से कितने स्कूल जा रहे हैं, यह अब किसी को पता नहीं है।

2005 में शुरू हुए थे स्कूल
2005 से श्रम मंत्रालय के जरिए इन स्कूलों का संचालन करवाया जा रहा था। इसके पीछे मंशा यही थी कि यहां उन बच्चों को पढऩे-लिखने का अवसर मिले। वहां हर साल ऐसे बच्चों का एडमिशन करवाया जाता था, जो काम कर अपनी जीविका चलाते हैं। सरकार इन्हें छात्रवृत्ति से लेकर ड्रेस, टाई, जूते और कॉपी, किताबें देती थी। ताकि पढ़ाई के खर्चे का भार उन पर न पड़े।

आंकड़ों पर एक नजर
कुल स्कूल - 326
कर्मचारी-अधिकारी - 1400
शैक्षणिक अनुदेशक - 2
लिपिक - 1
भृत्य - 1

बाल श्रमिक की मान्यता में भी गड़बड़ी
बाल श्रम की परिभाषा में माता-पिता के साथ या पारिवारिक काम करने वाले बच्चे बाल श्रमिक की श्रेणी में नहीं आते हैं। परंपरागत व्यवसाय करने वाले बच्चे भी बाल श्रमिक के दायरे में नहीं आते। इतना ही नहीं, अब तो 14 साल या उससे अधिक उम्र के बीड़ी मजदूरों को भी बाल श्रमिक के दायरे से बाहर कर दिया गया है। जिनमें कचरा बीनने वाले, ट्रेन, बस, रेलवे स्टेशन सहित अन्य स्थानों पर खेल- करतब दिखाने वाले या फेरी लगाकर सामग्री बेचने वाले सहित कई अन्य तरह के काम करने वाले बच्चे बाल श्रमिक की श्रेणी में नहीं आते।

स्टेशन से पकड़े गए 18 बच्चे
बीते सप्ताह बाल संरक्षण समिति और रेलवे पुलिस (जीआरपी) की संयुक्त टीम ने रेलवे स्टेशन से 18 घुमंतू बच्चों को पकड़ा। इनमें से दो नशे के आदी थे। 8 नाच-गाकर तमाशा दिखाने वाले, तीन भीख मांगने वाले और 3 कचरा बीनने वाले शामिल थे।

स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह ने बताया कि बाल श्रमिक स्कूल बंद होने के बाद बाहर हुए कर्मचारियों के लिए सरकार विचार कर रही है। जल्द ही कुछ निर्णय लिया जाएगा।

स्कूल कर्मचारी संघ के बाल श्रमिक के प्रदेश उपाध्यक्ष जय प्रकाश साहू ने बताया कि वर्तमान के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने खुद पत्र लिख कर बेरोगार हुए कर्मचारियों के संविलियन के पूर्व मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। अब उनसे उम्मीद है कि वो हमारे लिए कोई सकारात्मक कदम उठाएंगे।


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