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हाल ए उत्कृष्ट आत्मानंद स्कूल.. भर्ती के फर्जी मामले, न मिल रही सैलरी और न बच्चों के लिए कोई सुविधा

Atmanand School: फंड की कमी के कारण शिक्षकों को भी कई माह तक वेतन नहीं मिल पा रहा है। उन्हें स्कूल में किए जाने वाले काम के लिए भी भटकना पड़ता है...

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Raipur Atmanand school

स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट ( Photo - Patrika )

अनुराग सिंह. राज्य में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को समान अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से वर्ष 2020 में शुरू किए गए स्वामी (Atmanand School) आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों का स्तर गिरता जा रहा है। फंड की कमी के कारण शिक्षकों को भी कई माह तक वेतन नहीं मिल पा रहा है। उन्हें स्कूल में किए जाने वाले काम के लिए भी भटकना पड़ता है। इन्हीं कारणों से शिक्षक यहां काम करने से कतराते हैं। अभी स्कूल का रिजल्ट तो 94 फीसदी से ज्यादा है, लेकिन स्थिति ऐसी ही रही तो पढ़ाई पर भी काफी असर पड़ सकता है। वहीं विद्यालयों में अव्यवस्थाओं का भी अंबार है।

Atmanand School: काम होने के बाद बिल का पैसा

विद्यालयों को मिलने वाले अनुदान को खर्च करने की प्रक्रिया काफी कठिन है। कोई भी कार्य शुरू करने के पहले अप्रूवल लेने और काम पूरा होने के बाद बिल लगाना पड़ता है। इसके बाद राशि आवंटित होती है। ज्यादातर स्कूलों को 4 साल से ज्यादा हो गए हैं। इससे सफाई, पुताई, लाइट के साथ ही शैक्षणिक कार्य में आने वाले खर्च में भी दिक्कत होती है। इस कारण स्कूल में अव्यवस्था होती है।

यह भी पढ़ें: Atmanand School Admission 2025: स्वामी आत्मानंद में सीट खाली! 10 जून तक कर सकते है आवेदन, जानें details..

साफ-सफाई के लिए अनुदान ही नहीं

जानकारी के अनुसार, कई स्कूल में साफ-सफाई को लेकर काफी शिकायतें भी आई हैं। विद्यालयों में सफाई कर्मियों की भी कमी है। रायपुर के ही कई आत्मानंद विद्यालयों में भी ये शिकायत आई है। शौचालय में न तो साफ-सफाई होती है और न ही छात्राओं के लिए लगाई गई सैनेटरी पैड की मशीन ठीक से काम करती है। शौचालयों में डस्टबिन भी नहीं है। इसके कारण सैनेटरी पैड इधर-उधर पडे रहते हैं।

स्वामी आत्मानंद विद्यालयों की शुरुआत में निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में आवेदन किए थे। अभी स्थिति ऐसी है कि स्कूलों में आवेदन की संख्या भी कम हो रही है। जानकारी के अनुुसार बीपी तिवारी स्कूल में इस साल 421 आवेदन आए। पिछले वर्ष यह आंकड़ा लगभग 700 था। वहीं, आरडी तिवारी स्कूल में प्रवेश के लिए इस साल केवल 1500 ही आवेदन प्राप्त हुए। इससे साफ होता है कि स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में आवेदन प्राप्त होने की संख्या में कमी आई है। जानकारों की मानें तो स्कूल की संख्या बढ़ने के कारण भी ऐसा हो सकता है।

शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी

स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में भर्ती में फर्जी नियुक्ति का मामला सामने आया है। स्कूलों में भर्ती के लिए बिना डिग्री वाले अभ्यर्थी को भी नियुक्ति दे दी गई। रायपुर के साथ ही जांजगीर-चांपा जैसे कई जिलों में भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के मामले सामने आए। इससे स्कूल के लिए लोगों की सोच में बदलाव भी हुए हैं। वहीं ज्यादातर स्कूलों में शिक्षमों की कमी भी है।

क्षेत्र के अनुसार आवेदन

आत्मानंद विद्यालयों के प्राचार्यों के अनुसार अब अभिभावक व छात्र अपने नजदीकी स्वामी आत्मानंद स्कूल में ही प्रवेश के लिए आवेदन करते हैं। पहले ऐसा नहीं था। अभी जो आवेदन प्रवेश के लिए प्राप्त हुए हैं, उसमें ज्यादातर आवेदन ऐसे छात्र-छात्राओं के थे जो स्कूल के आसपास ही रहने वाले थे। इसके कारण भी आवेदन कम आए हैं।

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के स्टेट प्रेसिडेंड संजय शर्मा ने कहा कि राज्य में संचालित स्वामी आत्मानंद विद्यालय की योजना काफी अच्छी है। अंग्रेजी माध्यम स्कूल अच्छे हैं, लेकिन बाद में काफी अव्यवस्थाएं हो गईं। स्कूल तो अच्छा शुरू हुआ था। अभी जिम्मेदार उन्हें मेंटेन करने में रुचि नहीं रख रहे हैं। स्कूल के डेवलपमेंट और इंटर्नल एजुकेशन एक्टिविटी पर ध्यान देना चाहिए।

एडीईओ कलावती भगत ने कहा कि आत्मानंद स्कूलों में फंड की कमी तो है। यहां किसी स्टूडेंट्स से फीस नहीं ली जाती है। स्कूल में अव्यवस्थाएं भी हुई है, जल्द ही इसे ठीक कर लिया जाएगा। ताकि स्टूडेंट्स को सभी तरह की सुविधाएं मिल सकें।

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