
CM भूपेश बघेल ने किया मंत्रियों में बड़ा फेरबदल पढ़े किस मंत्री को मिला....
रायपुर. राज्य सरकार ने जमीन और मकान के बाजार मूल्य गाइडलाइन दरों में 30 प्रतिशत की कटौती का फैसला किया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh baghel) की अध्यक्षता में शुक्रवार रात हुई राज्य मंत्रिपरिषद (State cabinet) की बैठक में इसकों मंजूरी दे दी गई।
बताया गया कि पूरे प्रदेश में रियल एस्टेट के बाजार मूल्य गाइडलाइन दरों में 30 प्रतिशत की कमी की जा रही है। इसके साथ ही पंजीयन शुल्क 0.8 प्रतिशत से बढ़ाकर गाइडलाइन मूल्य का 4 प्रतिशत कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ में रियल एस्टेट में स्टाम्प ड्यूटी(Stamp Duty in Real Estate) , पंजीयन शुल्क आदि पर 7.05 प्रतिशत कर भार था। पंजीयन शुल्क बढ़ाने से ये कर भार 10.25 हो जाएगा। सरकार का दावा है, इस वृद्धि के बावजूद सौदे के पक्षकारों के भुगतान में मामूली अंतर आएगा। अधिकारियों ने मंत्रिपरिषद को बताया कि नई व्यवस्था से रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र के विकास में तेजी आएगी। लोगों को किफायती दरों पर मकान मिल पाएगा और इस क्षेत्र में लोगों के लिए रोजगार के रास्ते भी खुलेंगे।
अफसरों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों में दस्तावेजों के पंजीयन से होने वाले राजस्व आय में कमी आई है। इसकी एक वजह कई जगहों पर संपत्ति की गाइडलाइन दरों के बजाय मूल्य से अधिक होना पाया गया। ऐसे में इसको युक्तियुक्त किया जाना जरूरी हो गया था।
सरकार ने आय बढ़ाने के लिए तामिलनाडु और मध्यप्रदेश से सबक लिया है। अधिकारियों ने बताया, तामिलनाडु सरकार ने 2017-18 में गाइडलाइन दरों में 33 प्रतिशत की कटौती कर 3 प्रतिशत का ड्यूटी बढ़ा दिया। इसकी वजह से पहले ही वर्ष उसका राजस्व 30 प्रतिशत बढ़ा। दूसरे वर्ष पंजीयन से 21 प्रतिशत राजस्व बढ़ा। मध्यप्रदेश सरकार ने भी जून में गाइडलाइन दरों में 20 प्रतिशत की कटौती की। वहीं पंजीयन शुल्क 2.3 प्रतिशत बढ़ा दिया।
सरकार ने कोरबा में स्थापित 50-50 मेगॉवाट की चार बिजली उत्पादन इकाइयों को बंद करने का फैसला किया है। यह चारों इकाइयां 2017-18 से ही बंद चल रही हैं। इसको लेकर पहले ही फैसला हो चुका है।
रियल एस्टेट (Real Estate) कारोबारी अनिल जैन ने बताया कि सरकारी गाइडलाइन के दर में 30 फीसदी की कमी और पंजीयन शुल्क में 4 फीसदी की बढोतरी से ग्राहकों को कोई फायदा नहीं होगा, बल्कि सरकार का राजस्व इसमें जरूर बढ़ेगा। जिन इलाकों में बाजार भाव सरकारी गाइडलाइन दर से कम हैं, वहां पर बिल्डरों को आयकर में राहत मिलेगी, लेकिन ग्राहकों को इसमें घाटा ही होगा। उदाहरण के तौर पर समझें इसमें यदि किसी जमीन का बाजार भाव 1000 रुपए प्रति वर्गफीट है, वहीं सरकारी गाइडलाइन रेट 700 रुपए है। इस स्थिति में बिल्डर ग्राहक से एक हजार रुपए की कीमत पर एग्रीमेंट कराता है, वहीं रजिस्ट्री भी उसी दर पर होती है। पहले रजिस्ट्री शुल्क 7.05 फीसदी था, जो बढकऱ 10.25 फीसदी हो जाएगा। इस स्थिति में पहले जहां ग्राहकों को रजिस्ट्री में 70 हजार 500 रुपए लगते थे, अब उसी जमीन के लिए 1 लाख 2500 खर्च करना होगा।
दूसरी स्थिति में यदि जमींन का बाजार भाव 700 रुपए प्रति वर्गफीट है, वहीं सरकारी गाइडलाइन दर 1000 रुपए है। इस स्थिति में 30 फीसदी की राहत के बाद सरकारी गाइडलाइन दर 700 रुपए होगी। बिल्डर बाजार भाव में ग्राहकों से एग्रीमेंट कराता है। इस स्थिति में ग्राहकों को जहां रजिस्ट्री शुल्क 7.05 फीसदी की दर से उसे 70 हजार 500 रुपए देने पड़ते थे, उसे ही अब 4 फीसदी की वृद्धि की वजह से उसे 71 हजार 750 रुपए अदा करना होगा। कुल मिलाकर इससे ग्राहकों को कोई खास राहत नहीं मिलेगी, बल्कि यह बाजारा मूल्य और सरकारी गाइडलाइन रेट में विषमता दूर करने के लिए किया गया है। यदि पंजीयन शुल्क में वृद्धि नहीं की जाती तो यह ग्राहकों के लिए निश्चित तौर पर फायदे का सौदा होता।
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Published on:
20 Jul 2019 12:05 pm
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