
मेरे पैरेंट्स अच्छी छत्तीसगढ़ी बोल लेते थे। घर में कला का माहौल था। मुझे पंथी पसंद था। ददरिया भी गा लेता था। इसके अलावा और भी कई विधाएं हैं जिसे मैं जानता हूं लेकिन फिल्मों में इसका उपयोग नहीं किया। शायद यही मेरा गिल्ट है जो कहता रहा कि छत्तीसगढ़ के लिए कुछ किया नहीं तो यहां के शहरों के नाम ही रख दे। इसलिए मैं कई फिल्मों में छत्तीसगढ़ की सिटी के नाम रखता हूं। अब मुझे लगता है कि वह वक्त आ गया है जब छत्तीसगढ़ के लिए कुछ करूं। यह कहा जाने-माने बॉलीवुड डायरेक्टर अनुराग बसु ने।
वे एक इवेंट में शामिल होने रायपुर आए थे। मीडिया से बातचीत में कहा कि एक्टिंग के लिए किस्मत जरूरी है लेकिन अन्य विधाएं जैसे कैमरा या राइटिंग। इसके लिए टैलेंट का होना जरूरी है। भिलाई में रहते हुए मेरा फाउंडेशन बहुत मजबूत हुआ और मुुंबई में उसी को निचोड़ रहा हूं।
एक्टिंग सीखी नहीं जाती
जो बच्चा झूठ बोलकर मां को Bewkoof बना दे उससे बढ़कर कोई एक्टर नहीं होता। एक्टिंग या थिएटर सीखने वाली चीज नहीं है, जिंदगी सब सिखा देती है। मैं कुछ प्रोग्राम में जज बनकर भी जाता हूं लेकिन डांस के सेग्मेंट मैं दर्शक ही रहता हूं। क्योंकि डांस मेरा जॉनर नहीं है। मेरा अभिनय तो छत्तीसगढ़ की उपज है।
हर दौर में रहा है सिनेमाघर को खतरा
ओटीटी के बढ़ते क्रेज से सिनेमाघरों की चुनौती के सवाल पर बोले- ये डिस्क्शन हर दौर में रहा है। जब वीसीआर आया तब भी, जब सीडी-डीवीडी आया तब भी। उस वक्त भी थिएटर पर इसका बुरा असर पड़ा लेकिन ज्यादा दिन तक नहीं। भारतीय दर्शक दोस्तों और फैमिली के साथ सैर-सपाटा व फिल्में देखना पसंद करता है। इसलिए सिनेमाघर चलते ही रहेंगे। बता दें हाल ही में आई फिल्म लूडो में भिलाई शहर का नाम का जिक्र है।
Published on:
16 Oct 2022 04:59 pm
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