
जितेंद्र दहिया@रायपुर. दवा निगम में दवा कंपनियों का भुगतान रोक कर कमीशनखोरी करने का खमियाजा एक नहीं, बल्कि देशभर की तकरीबन 22 दवा कंपनियों को भुगतना पड़ रहा है। अलग-अलग कारणों से छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन ने (सीजीएमएससी) ने तकरीबन 48 करोड़ रुपए का भुगतान दवा कंपनियों को सप्लाई करवा कर भी नहीं दिया है।
इस संबंध में दवा निगम प्रबंधन का कहना है कि डीएचएस से दवाओं की मांग तो भेजी जाती है, लेकिन भुगतान के लिए बजट पर्याप्त नहीं है। पत्रिका को मिली जानकारी के मुताबिक 2016 -17 में डीएचएस ने 48 करोड़ रुपए का बजट दवा खरीदी के लिए दिया है। जबकि 100 करोड़ की दवाओं की खरीदी की गई। इसके अलावा मार्च 2017 में 40 करोड़ की राशि डीएएस से दी गई गई, जबकि अब तक की खरीदी 95 करोड़ है।
स्वास्थ्य संचालनालय से दवा खरीदी के लिए मांग पत्र पहले भेजा जाता है। दवा निगम दवाओं की खरीदी की टेंडर प्रक्रिया पूरी करती है। निविदा भरने वाली कंपनी से सप्लाइ करवाई जाती है। दवाएं निगम के वेयर हाउस में आ जाती है। जब स्वास्थ्य विभाग गोदामों से दवाएं उठा लेता है, तब जाकर स्वास्थ्य संचालनालय से भुगतान किया जाता है।
हाइकोर्ट लगातार एंटीरेबिज इंजेक्शन की खरीदी के लिए स्वास्थ्य विभाग को नोटिस भेज रहा है, लेकिन एंटी रेबिज सप्लाइ करने वाली कंपनी का भी भुगतान रोकने के कारण कंपनी सप्लाइ करने से इंकार कर रही है। आज तक सीजीएमएसी के पास सिर्फ 66 इंजेक्शन स्टॉक में पड़े हुए हैं।
विरेंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद से ही एसीबी ने सीजीएमएसी से सभी एेसी कंपनियों की डिटेल मांगी है, जिनका भुगतान रुका हुआ है। भुगतान रुकने के पीछे के कारण की भी जानकारी एसीबी ने लिखित में ली है।
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ सेवा संचालक रानू साहू ने कहा कि मांग के अनुसार लगातार बजट हमारे द्वारा जारी किया जाता है। फिर भी दवा कंपनियों का भुगतान रुका है। इसके बारे में सीजीएमएसी ही जानकारी दे पाएगा।
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक वी रामाराव ने बताया कि दवा खरीदी में कुछ कंपनियों का भगतान रुका है। वर्तमान में सीजीएमएससी के पास बजट नहीं हैं। इसलिए भुगतान नहीं हो पा रहा है। डीएचएस के पास फंड के लिए पत्र भेजा गया है।
Published on:
06 Apr 2018 10:54 am

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