
संपत्ति में बेटियों के हक के नियमों में हुआ बदलाव, पढ़िए नए नियम
रायपुर/भिलाई. संपत्ति में बेटियों के हक को लेकर बने नियमों में बदलाव हुए है। भारतीय स्टेट बैंक के स्वतंत्र डायरेक्टर डॉ. गिरीश अहूजा सोमवार को सीए शाखा भिलाई में हुए कार्यक्रम का हिस्सा बने। वक्ता के तौर पर उन्होंने वसीयत के नियम और इसमें हाल के बदलाव साझा किए। उन्होंने बताया कि अब बेटियों के लिए संपत्ति में विशेष स्थान सुनिश्चित किया गया है।
2005 में बने नियम के हिसाब से हिंदू अविभाजित परिवार आयकर अधिनियम में बेटी की शादी हुई है या नहीं इससे संपत्ति के बंटवारे पर कोई फर्क नहीं पड़ता। नियम में है कि बेटी को भी पिता की संपत्ति में उतना स्थान मिलेगा, जितना बेटों को। हालांकि बेटी सिर्फ पिता की संपत्ति पर ही अपना अधिकार जता सकती हैं, दादा की संपत्ति पर नहीं।
डॉ. अहूजा ने बताया कि बहुत कम ही लोग यह बात जानते हैं कि आयकर विभाग हिंदू अविभाजित परिवार यानि एचयूएफ को हमारी-आपकी तरह एक अलग इकाई के तौर पर देखता है और इसकी आयकर गणना परिवार के सदस्यों की आयकर गणना से अलग होती है। कार्यक्रम में उन्होंने हिंदू अविभाजित परिवार के लिए आयकर नियमों की जानकारी दी।
डॉ. अहूजा ने आगे कहा कि वसीयत बनाते समय डॉक्टर, सीए और वकील अहम रोल अदा करते हैं। डॉक्टर पुष्टि करता है कि वसीयत बनाने वाले ने पूरे होश-हवास में हस्ताक्षर किए हैं। अधिवक्ता या सीए के साथ में होने पर वसीयत में कानूनी अड़चन की संभावना नहीं रहती। सीए और वकील किसी भी विवाद को टाल सकते हैं।यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सिर्फ आखिरी वसीयत को ही तरजीह दी जाती है। कोई भी व्यक्ति वसीयत लिख सकता है।
Updated on:
27 Nov 2018 11:41 am
Published on:
27 Nov 2018 11:39 am
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
