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छत्तीसगढ़ की रामलीला नाटक मंडली ने रचा इतिहास, अब यहां हर बच्चा कहलाता है राम व रावण

आज बलौदाबाजार जिले के भाटापारा के श्रीआदर्श रामलीला नाटक मंडली ने इतिहास रच दिया है।

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Ramlila natak mandali

चंदू निर्मलकर@रायपुर. छत्तीसगढ़ का एक गांव एेसा भी है जहां हर बच्चा राम व रावण कहलाता है। एेसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि राम व रावण की भूमिका बड़े नहीं बल्कि छोटे बच्चे ही निभाते हैं। नाटक मंडली 98 साल से इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं। तभी तो आज बलौदाबाजार जिले के भाटापारा के श्रीआदर्श रामलीला नाटक मंडली ने इतिहास रच दिया है। वर्ष 1920 से प्रारंभ रामलीला पूरे छत्तीसगढ़ राज्य की ऐसी रामलीला संस्था है जो इतिहास सुनहरे अक्षरों में दर्ज करते हुए अपने 98वें वर्ष को पूरा लिया है। जानिए पूरी कहानी...

यहां अब हर बच्चा कहलाता है राम, रावण
इस संस्था के कलाकार नगर के नन्हें-मुन्हें रहते हैं। नवरात्रि में नौ दिन लगातार लीलाओ का मंचन किया जाता है। इस रामलीला ने अद्भत तरीके से राम चरित मानस, बाल्मिकी रामायण, रामचरित्र दर्पण, राधेश्याम रामायण, वसुनायक रामायण, आर्य संगीत रामायण, हिन्दी अनुवाद रामायण एवं अनेक साहित्यों का समावेश किया गया है। नवमी के दिन भव्य देवीलीला दिखाई जाती है। तभी तो हर बच्चा राम व रावण कहलाता है।

देखने करने लगभग 10 हजार लोगों की भीड़ रामलीला में उमड़ती है। शहर के रावणभाटा मैदान में दशहरा के दिन रावण वध की लीला की जाती है। दशहरा मेला में हजारों की संख्या में लोग रावण मारने की लीला व दशहरा उत्सव मनाने पहुंचते हैं। बेहतरीन साज-सज्जा, अस्त्र-शस्त्र और वस्त्र। लगभग साढ़े तीन-तीन किलो के चांदी का मुकुट, राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुहन, सीता, हनुमान बनने वाले पात्रों के लिए मंडली में दान स्वरूप मौजूद हैं।

पद्मश्री अनुज शर्मा भी दिखा चुके हैं अपनी कलाकारी का जौहर
संस्था अंग्रेजों के समय के लोगों में धर्म का प्रचार कर रही है। इसमें पद्मश्री अनुज शर्मा, विधायक शिवरतन शर्मा, जिला पंचायत सभापति अश्वनी शर्मा अपनी कलाकारी के जौहर दिखा चुके हंै। वर्तमान में रामलीला में छठवीं पीढी़ के कलाकारों द्वारा मंचन किया जा रहा है। इस संस्था से जुड़े कलाकार राजिम कुंभ महोत्सव में भी अपनी कला का लेाहा मनवा चुके हैं।

इस वर्ष ये कलाकार दे रहे प्रस्तुति
नवरात्रि के दूसरे दिन 22 सिंतबर को गणेश पूजन व मुकूट पूजन के साथ रामलीला की शुरुआत हो चुकी है। व्यासगद्दी में संस्था के अध्यक्ष प्रकाश शर्मा, धन्जी जोशी, हेमंतमल,रामजी जोशी आदि रहेंगे। रामलीला की सभी गतिविधियों की व्यवस्था संभालने वाले मोनू मल, सूर्यकांत शुक्ला, मंच व्यवस्था पूर्णेंदु त्रिवेदी, नासिर बांठिया और लाला शर्मा हैं। कलाकारों में बलराम जोशी, कोमल शर्मा, जगदीश वैष्णव, कैलाश पुरोहित, अभि शर्मा, आदित्य जोशी कृष्णा अग्रवाल, हर्ष दधिच, छोटा दधिच, अंकित अग्रवाल, तुसार जायसवाल, कृष्णा मल, श्याममल, श्रेयांश शर्मा, हरिराम मिस्त्री अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। इस साल का मुख्य आकर्षण एक छोटे से बालक द्वारा तबलावादन और चौथी कक्षा के बच्चे के द्वारा लक्ष्मण का किरदार को है।

रामलीला भले साल में एक बार होती है लेकिन इसकी कार्यशैली, अभिनय पेशेवर रामलीला से ऊपर रहती है, दस-दस साल के बच्चे मंजा हुआ अभिनय करते हंै। इस साल रामलीला अपना 98वें साल का इतिहास रचेगी। मोनुमल, व्यवस्थापक रामलीला भाटापारा

इस रामलीला का संगीत सबसे मजबूत पक्ष है। रामलीला खत्म होने के बाद से फिर से शुरू होती है साथ ही तैयार करने वाले अपने दैनिक कामों से अपना समय निकाल कर देते हैं।
प्रकाश शर्मा, अध्यक्ष रामलीला संस्था भाटापारा