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सिविल जज परीक्षा : छत्तीसगढ़ की प्रिया ने मध्यप्रदेश में किया टॉप

सिविल जज परीक्षा के नतीजे जारी: तिल्दा से हुई स्कूलिंग, एचएनएलयू से की पढ़ाई

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सिविल जज परीक्षा : छत्तीसगढ़ की प्रिया ने मध्यप्रदेश में किया टॉप

प्रिया ने दसवीं क्लास में ही तय किया था जुडिशरी में जाना है।

ताबीर हुसैन @ रायपुर. हाल ही में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (एमपीएचसी) ने सिविल जज (एमपीसीजे) ग्रेड 2 प्रवेश स्तर भर्ती 2019 का अंतिम परिणाम जारी किए। इसमें रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा निवासी प्रिया राठी ने पहले ही प्रयास में टॉप किया है। उन्हें 277.33 माक्र्स मिले हैं। पिता राजकुमार राठी बिजनेसमैन हैं और मां सरिता होम मेकर। प्रिया की स्कूलिंग तिल्दा से हुई। हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी नवा रायपुर से उन्होंने लॉ कम्लीट किया। इसके बाद कोचिंग करने इंदौर गईं। प्रिया कहती हैं, मेरा जीके कमजोर था इसलिए मैंने कोचिंग के अलावा इस पर पुरजोर ध्यान दिया।

आंखों में काली पट्टी बंधी मूर्ति से जागी थी जिज्ञासा

25 वर्षीय प्रिया ने पत्रिका से खास बातचीत में बताया, जब मैं दसवीं में थी तो हिस्ट्री की बुक में आखों में काली पट्टी बंधी मूर्ति को देखा। मैंने टीचर से इसके बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि यह न्याय की मूर्ति है। पट्टी इसलिए बंधी है क्योंकि इसके पास कोई भी आए, बिना किसी भेदभाव के यह न्याय करती है। उनकी यह बात दिल में घर कर गई और तभी से मैं जुडिशरी के प्रति अट्रेक्ट हुई। पापा भी चाहते थे कि मैं लॉ करूं।

इंटरव्यू में कॉन्फिडेंस परखा जाता है

इंटरव्यू में पैनल आपका कॉन्फिडेंस परखा जाता है। पहले तो मुझसे पूछा गया कि लॉ का क्षेत्र ही क्यों चुना। मैंने काली पट्टी वाली बात उनसे शेयर की। इसके कुछ ऐसे सवाल थे जिसके जरिए मेरा कॉन्फिडेंस परखा गया। यह भी पूछा कि कभी कोर्ट गईं हैं। मैंने बताया कि इंटर्नशिप के दौरान गई थी। ड्रॉफ्टिग का काम किया था। आखिर में पूछा गया कि अगर आप जज बन गईं। कोई आपसे कहे कि यह केस आपके कलिग जज के पास पेंडिंग है। आप मेरे लिए उनसे बात करें। तो आप क्या करेंगी। मैंने कहा था कि न्याय हमेशा तथ्यों और तर्कों के आधार पर होना चाहिए। मैं मानती हूं कि जो दूसरे जज हैं वे भी इसी आधार पर फैसला देंगे। इसलिए मैं दखलअंदाजी नहीं करूंगी।

तैयारी में निरंतरता जरूरी

रणनीति को लेकर प्रिया कहती हैं, एग्जाम की तैयारी में निरंतरता जरूरी है। कोविड टाइम पर आठ से दस घंटे पढऩा एक चुनौती जैसा था। टीचर ने कहा कि चाहे जो भी हो कंटीन्यूटी बनाए रखना। मैंने महाराष्ट्र का एग्जाम भी दिया था। प्री निकाल ली लेकिन मेंस नहीं दे पाई क्योंकि मेरे पास मराठी लैंग्वेज का सर्टिफिकेट नहीं था। कोविड के चलते वैकेंसी में देरी थी इसलिए मैंने एलएलएम में नामांकन भर दिया था।

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