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IAS के इस्तीफे पर पहली बार बोले CM, कहा – अभी तो इस्तीफा मंजूर हुआ है, कहां जाएंगे नही हुई बात

रायपुर के पूर्व कलक्टर ओपी चौधरी को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने पहली बार कुछ बोला है

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कलेक्टर ओपी चौधरी के इस्तीफे पहली बार बोले सीएम रमन

मंजूर हुआ है। आगे उनका क्या रास्ता होगा, इसपर अभी ओपी से बात नहीं हुई है।

इधर, भाजपा के लोगों का कहना है कि ओपी को पार्टी में लाने की भूमिका महीनों पहले बन गई थी। रायगढ़ के खरसिया के रूप में उनका क्षेत्र भी लगभग तय है। तय हुआ था कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के सामने इसकी घोषणा होगी, उसके कुछ दिन पहले ही इस्तीफा होगा। शाह के 22 अगस्त के संभावित दौरे से पहले उनका इस्तीफा तो गया लेकिन इस बीच शाह का दौरा टल गया।

लडऩे के लिए खरसिया ही क्यों : बताया जा रहा है कि अमित शाह ने कुछ भी करके इस बार कांग्रेस के गढ़ तोडऩे का निर्देश दिया है। रायगढ़ जिले की खरसिया सीट ऐसे ही गढ़ों में से एक है। यहां से एक बार भी भाजपा चुनाव नहीं जीती है। 1988 में इस सीट से अर्जुन सिंह ने तबके दिग्गज नेता दिलीप सिंह जूदेव को हराया था। 1990 के चुनाव से नंद कुमार पटेल वहां के विधायक रहे। उनके नहीं रहने पर 2013 से इस सीट पर उनके बेटे उमेश पटेल विधायक हैं।

इस जादू के पीछे ग्रामीण क्षेत्रों में अघरिया पटेल समाज की निर्णायक भूमिका को माना जाता है। चौधरी अभी अघरिया समाज के युवाओं में सबसे लोकप्रिय हैं। इसका फायदा भाजपा लेना चाहती है।

खरसिया से भाजपा के पूर्व प्रत्याशी ने किया ओपी का स्वागत : खरसिया विधानसभा से भाजपा के पूर्व प्रत्याशी और मौजूदा जिलाध्यक्ष जवाहर लाल नायक ने ओपी चौधरी की उम्मीदवारी का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, अगर ओपी चौधरी खरसिया से उम्मीदवार बनकर आते हैं तो हमारी जीत होगी। उन्होंने कहा कि यह सच है कि मैं चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहा था लेकिन पार्टी का आदेश सर्वोपरि है। नायक ने कहा, चौधरी जिस तरह से खरसिया का दौरा कर रहे थे उससे कुछ-कुछ अंदाजा लग रहा था कि वो चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। उन्होंने कहा, चौधरी को अगर चुनाव लडऩा होगा तो खरसिया से ही लड़ेंगे, क्योंकि खरसिया और रायगढ़ को छोडक़र अन्य सीटें आरक्षित हैं।

इस्तीफा देने के महज एक दिन बाद रक्षाबंधन पर ओ.पी. चौधरी ने ट्विटर पर अपनी बहन और भाई के साथ तस्वीर साझा की है। उन्होंने अपनी बहन को याद करते हुए लिखा है कि दीदी शारदा ने हमेशा सिखाया कि केवल खुद के लिए नहीं, सबके लिए बड़े सपने देखना। ओ.पी. चौधरी ने लिखा है कि उनकी सीख मेरे व्यक्तित्व का हिस्सा बन गई है। बता दें कि उनकी बहन का 2008 में निधन हो गया था।

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