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Dr. Bhimrao Ambedkar Hospital: डायबिटीज व हार्मोन के मरीज़ों को नहीं मिल रहा स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का फायदा, MD मेडिसिन के भरोसे

Dr. Bhimrao Ambedkar Hospital: प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी आंबेडकर अस्पताल में प्रदेश का एकमात्र इंडिक्रियोनोलॉजिस्ट है, लेकिन इसका फायदा मरीजों को नहीं मिल रहा है। डाॅक्टर पीडियाट्रिक विभाग में कार्यरत है। ऐसे में वे केवल बच्चों का इलाज कर रहे हैं। बाकी मरीज जनरल फिजिशियन यानी एमडी मेडिसिन के भरोसे हैं।

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Dr. Bhimrao Ambedkar Hospital: डायबिटीज व हार्मोन के मरीज़ों को नहीं मिल रहा स्पेशलिस्ट डॉक्टर का फायदा, MD मेडिसिन के भरोसे

Dr. Bhimrao Ambedkar Hospital: डायबिटीज व हार्मोन के मरीज़ों को नहीं मिल रहा स्पेशलिस्ट डॉक्टर का फायदा, MD मेडिसिन के भरोसे

Chhattisgarh News: प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी आंबेडकर अस्पताल में प्रदेश का एकमात्र इंडिक्रियोनोलॉजिस्ट है, लेकिन इसका फायदा मरीजों को नहीं मिल रहा है। डाॅक्टर पीडियाट्रिक विभाग में कार्यरत है। ऐसे में वे केवल बच्चों का इलाज कर रहे हैं। बाकी मरीज जनरल फिजिशियन यानी एमडी मेडिसिन के भरोसे हैं। यानी डायबिटीज व हार्मोन संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर तो हैं, लेकिन उनकी सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। जबकि अस्पताल में ही स्पेशलिस्ट डिग्री होने के बावजूद सुपर स्पेशलिटी इलाज कर रहे हैं। अस्पताल में एक अलग विभाग खोला जा सकता है, लेकिन इसके लिए न शासन और न ही प्रबंधन कर रहा है।

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पीडियाट्रिक विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. धीरज सोलंकी हैं। उन्होंने पांच साल पहले सरकारी कोटे (स्पांसरशीप केटेगरी) से इंडिक्रियोलाॅजी जैसे सुपर स्पेशलिटी कोर्स में डीएम की डिग्री ली है। जब उन्होंने ये कोर्स किया, तब वे सिम्स बिलासपुर में पदस्थ थे। पांच साल से आंबेडकर अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं। चूंकि डीएम के पहले उनके पास एमडी पीडियाट्रिक की डिग्री है इसलिए वे अभी केवल बच्चों का इलाज कर रहे हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने और न अस्पताल प्रबंधन ने उनकी डिग्री का सही उपयोग किया।

कई डॉक्टरों समेत मरीजों का कहना है कि डॉ. धीरज डीएम की सैलरी नहीं मिलने का हवाला देकर सुपर स्पेशलिटी इलाज करने से मना करते हैं। हालांकि वे प्राइवेट प्रेक्टिस जरूर डीएम डिग्री के अनुसार कर रहे हैं। राजधानी में महज 3 से 4 इंडिक्रियोनोलॉजिस्ट हैं। इनमें एक एम्स में व बाकी निजी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं। एम्स में जहां कंसल्टेंट फीस महज 10 रुपए है। वहीं निजी अस्पतालों में 1000 से 1200 रुपए फीस ली जा रही है। यानी आजकल डायबिटीज व हार्मोन संबंधी बीमारी के इलाज के लिए लोग सुपर स्पेशलिटी डॉक्टर खोजते हैं। आंबेडकर में डॉक्टर होते हुए भी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।


ओपीडी में रोजाना 2000 से ज्यादा मरीजों का इलाज, इनमें 15 फीसदी डायबिटीज के
आंबेडकर अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 2000 या इससे ज्यादा मरीजों का इलाज किया जाता है। इनमें 15 फीसदी यानी 300 से ज्यादा मरीज केवल डायबिटीज व हार्मोन संबंधी बीमारी के होते हैं। इन मरीजों का इलाज मेडिसिन के अलावा जिरियाट्रिक व पीडियाट्रिक विभाग में होता है। कार्डियोलॉजी, कार्डियक सर्जरी के अलावा न्यूरो सर्जरी व न्यूरोलॉजी विभाग में भी डायबिटीज के मरीज पहुंचते हैं। डायबिटीज के कारण ही लोगों को हार्ट, न्यूरो संबंधी परेशानी होती है।


गिने-चुने मेडिकल कॉलेजों में चल रहा डीएम कोर्स
देश के गिने-चुने मेडिकल कॉलेजों में डीएम कोर्स चल रहा है। यानी सामान्य कोटे से डीएम कोर्स में किसी एमडी डिग्रीधारी डॉक्टर का चयन आसान नहीं है। डॉ. सोलंकी सरकारी कोटे से चयनित हुए हैं। पहले वे सामान्य केटेगरी से परीक्षा दिलाए, लेकिन चयन नहीं हो पाया। अस्पताल में ही कार्डियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने सरकारी कोटे से डीएम कार्डियोलॉजी कोर्स किया है। वे हार्ट के सभी बीमारी का इलाज कर रहे हैं। जबकि वे पहले मेडिसिन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर थे। डॉ. सीडी साहू के पास डीएम न्यूरो रेडियोलॉजी की डिग्री है। वे डिजिटल सब्सट्रेक्शन एंजियोग्राफी डीएसए मशीन से ब्रेन की एंजियोग्राफी कर रहे हैं। जबकि उनकी नियुक्ति एमडी रेडियोलॉजी के बतौर हुई है।

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डीएम की डिग्री है, बच्चों का कर रहा हूं इलाज
डीएम की डिग्री है और बच्चों का इलाज कर रहा हूं। सरकार इंडिक्रियोनोलॉजी विभाग के लिए नया सेटअप नहीं बना रही है तो इसमें हम क्या कर सकते हैं? -डॉ. धीरज सोलंकी, एसोसिएट प्रोफेसर पीडियाट्रिक्स

सेटअप बनाना डीन का काम है बड़ों का इलाज नहीं हो रहा है
नया विभाग या सेटअप बनाकर भेजना डीन का काम है। डीएम डिग्रीधारी डॉक्टर बच्चों में डायबिटीज व हार्मोन का इलाज कर रहे हैं। बाकी का इलाज नहीं हो रहा है। -डॉ. ओंकार खंडवाल, एचओडी पीडियाट्रिक्स

अलग विभाग खुलने से मरीजों का ही फायदा होगा
अस्पताल में इंडिक्रियोनोलॉजिस्ट हैं। अलग विभाग भी खोला जा सकता है। इससे मरीजों का ही फायदा होगा। अब तक क्यों इस संबंध में पहल नहीं हुई, पता करता हूं। -डॉ. एसबीएस नेताम, अधीक्षक, आंबेडकर अस्पताल