मातमी कोरोना: अक्टूबर के 29 दिनों में 1,009 मौतें, चिराग बुझे, बुजुर्गों का छीना सहारा और बच्चों से मां छुट गयी

भले ही विभाग यह कहे कि रिकवरी रेट 45.3 प्रतिशत से 86.7 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो सच भी है मगर डेथ रेट भी 1.05 पर जा पहुंची है। जो सर्वाधिक है। राष्ट्रीय डेथ रेट 1.5 प्रतिशत से 0.5 प्रतिशत ही कम है। उधर, गुरुवार को डेथ ऑडिट कमेटी की बैठक हुई।

By: Karunakant Chaubey

Published: 29 Oct 2020, 10:16 PM IST

रायपुर. प्रदेश में कोरोना संक्रमण नियंत्रण की तरफ बढ़ रहा हो, मगर वायरस से मौतों का आंकड़ा अनियंत्रित हो चुका है। हर दिन 7-8 मौतें हो रही हैं और पिछले महीनों, पिछले दिनों की मौत मिलाकर अक्टूबर में हर रोज औसतन 33 जानें जा रही हैं। अक्टूबर मातमी साबित हो रहा है। सिर्फ 29 दिनों में 1,000 से अधिक मरीज दमतोड़ चुके हैं। वायरस ने किसी के घर का चिराग बुझा दिया। किसी घर में बुजुर्गों का सहारा छीन लिया तो कई बच्चों को मां के आंचल से दूर कर दिया।

भले ही विभाग यह कहे कि रिकवरी रेट 45.3 प्रतिशत से 86.7 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो सच भी है मगर डेथ रेट भी 1.05 पर जा पहुंची है। जो सर्वाधिक है। राष्ट्रीय डेथ रेट 1.5 प्रतिशत से 0.5 प्रतिशत ही कम है। उधर, गुरुवार को डेथ ऑडिट कमेटी की बैठक हुई। जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन (ड्ब्ल्यूएचओ), यूनिसेफ, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल हुई। जिन्होंने निर्णय लिया कि शनिवार को सभी जिलों को डेथ ऑडिट के संबंध में प्रजेंटेशन दिया जाएगा, ताकि वे सही ढंग से मौत की जानकारी राज्य कोरोना कंट्रोल एंड कमांड सेंटर को भेज सकें।

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इन बीमारियों के मरीज पॉजिटिव, जा रही जान-

अल्कोहोलिक सिरोसिस लिवर, क्रोनिक पल्मोनरी डिसीज, हार्ट डिसीज, डाउन सिंड्रोम, हाईपरटेंशन कोरोनरी आर्टरी, एक्यूट लिवर डिसीज, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर, डायबीटिज, सेप्टिक शॉक, ल्यूकीमिया, खून की कमी और ब्रेन हेमरेज।

मौत की ये 3 वजहें

1- लक्षण पहचाने में देरी।

2- लक्षण समझ में आने के बाद भी कोरोना जांच न करवाना, दवा ले लेना।
3- गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचाना, कई बार समय पर ऑक्सीजन की व्यवस्था न हो पाना और इलाज में देरी भी।

त्योहार में संक्रमण का ज्यादा खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि हमें त्योहार मनाना चाहिए, मगर बहुत सावधानी से। क्योंकि इस दौरान संक्रमण का खतरा बहुत ज्यादा है। खासकर बुजुर्गों, गर्भवतियों और बच्चों को। क्योंकि ये अगर गंभीर स्थिति में पहुंच रहे हैं तो जान बचाना मुश्किल साबित हो रहा है। अभी देखने में यह आ रहा है कि लोगों ने कोरोना को हल्के में लेना शुरू कर दिया है। बाजारों में भीड़ बढऩे लगी है, यही संक्रमण की वापसी की वजह बन सकती है। तब 8 महीने की कोरोना नियंत्रण में जाया हुई मेहनत कहीं शून्य पर न पहुंच जाए।

मौतों की एंट्री बैक डेट पर

'पत्रिका' ने 1 अक्टूबर सबसे पहले यह खुलासा किया था कि जिले मौतों की जानकारी छिपा रहे हैं। 22 अक्टूबर को बताया कि 405 मौतों की एंट्री बैक डेट पर की गई। जिसके बाद धीरे-धीरे कर रोजाना मौत की पुरानी संख्या आंकड़ों में जोड़ी जा रही है। बुधवार को भी 36 मौतें, 24 घंटे में हुई मौतों के अतिरिक्त जोड़ी गईं। अभी भी जिलों में बड़ी संख्या में कोरोना से मौतें हुई हैं, जिनकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को नहीं है।

एक्सपर्ट-

अभी रायपुर से तो कम लेकिन बाकी जिलों से बड़ी संख्या में गंभीर मरीज आ रहे हैं। आप यह मानकर चलें कि आंबेडकर अस्पताल में आ रहे 100 में 60 मरीज गंभीर हैं। हमारे आईसीयू के सभी बेड भरे हुए हैं, इससे आप गंभीरता का अंदाजा लगा सकते हैं। मेरा मानना है कि लक्षण दिखे तो जांच जरूर करवाएं। क्योंकि देरी जानलेवा साबित हो रही है।

-डॉ. आरके पंडा, विभागाध्यक्ष टीबी एंड चेस्ट, डॉ. आंबेडकर अस्पताल

100 में 35 से 38 ऐसे मरीज हैं जो किसी अन्य बीमारी से ग्रसित हैं। अगर, बीमार व्यक्ति खुद की या परिजन उनमें आए लक्षण पहचानें, तो कोरोना से मौतों के आंकड़ों को कम किया जा सकता है।

-डॉ. सुभाष पांडेय, प्रवक्ता एवं संभागीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य विभाग

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Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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