New Innovation In Chhattisgarh : बिना डिजिटल ऑडिट के चल रहा ऑनलाइन रेकॉर्ड पोर्टल तकरीबन 10 माह से बंद है, जिसकी वजह से लोगों को भू-संबंधी रेकॉर्ड देखने को नहीं मिल रही है।
रायपुर. बिना डिजिटल ऑडिट के चल रहा ऑनलाइन रेकॉर्ड पोर्टल तकरीबन 10 माह से बंद है, जिसकी वजह से लोगों को भू-संबंधी रेकॉर्ड देखने को नहीं मिल रही है। बता दें कि 2017 में ऑनलाइन रेकॉर्ड रूम की सुविधा शुरू की गई थी, जिसे सभी जिलों की वेबसाइट में अलग से विंडो में रखा गया था। इस पोर्टल में 1929 से 1945 तक अंग्रेजों के जमाने का बना हुआ मिसल बंदोबस्त स्कैन कर अपलोड किया गया था। छत्तीसगढ़ के इलाकों में मिसल बंदोबस्त नागरिकों को यह बताता है कि उनकी जमीन कहां से कहां तक है।
लगाना पड़ता था कार्यालयों का चक्कर
1929 से अब तक का लैंड रेकॉर्ड निकालने के लिए पटवारी कार्यालय या राजस्व विभाग के लैंड रेकॉर्ड कार्यालय का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। जमीन से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी को मुफ्त में प्राप्त कर सकेंगे। अभी रेकॉर्ड रूम में जाकर 10 रुपए की रसीद कटवाना पड़ता है।
एनआईसी सेंट्रलाइज पोर्टल को फिर से सीजी मिसल बंदोबस्त रेकार्ड 2023 नाम से लांच करने की तैयारी की थी, जिसमें छत्तीसगढ़ के जमीन की हर कुंडली देखी जा सके। तीन माह पहले राजस्व विभाग ने इसके लिए एक सेंट्रलाइज डिजिटल विंडो तैयार करने की बात कही थी। हालांकि अभी तक इसकी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। लोगों को पटवारी कार्यालय और रेकार्ड रूम के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
14 जिलों से चालू करने की थी योजना